परमाणु बम न होता तो कोई पूछता भी नहीं, सिंगापुर के पूर्व राजनयिक ने पाकिस्तान को दिखाया आईना विश्व 2 महीने पहले 75
सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलाहारी कौसिकन ने पाकिस्तान को कड़ा रियलिटी चेक देते हुए कहा कि अगर इस देश के पास परमाणु हथियार न होते, तो आज दुनिया में इसकी कोई परवाह नहीं करता। उन्होंने पड़ोसी देशों पर दोष मढ़ने की पाकिस्तानी नीति को भी पूरी तरह खारिज कर दिया।

पाकिस्तान की सरकार और वहां के हुक्मरान भले ही खुद को दुनिया के सामने एक बड़े शांतिदूत और मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तमाम कोशिशों के बावजूद वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की छवि में कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव नहीं आया है। हाल ही में सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलाहारी कौसिकन ने पाकिस्तान को एक ऐसा कड़वा रियलिटी चेक दिया है, जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक खलबली मचा दी है। कौसिकन ने सीधे तौर पर कहा है कि अगर पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार नहीं होते, तो आज की तारीख में दुनिया का कोई भी देश उसकी परवाह तक नहीं करता।

राजनयिक बिलाहारी कौसिकन का तीखा हमला

सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलाहारी कौसिकन ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी हुक्मरानों की नीतियों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का नेतृत्व भले ही इस भ्रम में जी रहा हो कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख मजबूत कर ली है, लेकिन धरातल पर सच्चाई बहुत अलग है। कौसिकन ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान भले ही अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक जीत के दावे कर रहा हो, लेकिन वह अपने देश के भीतर चल रहे गंभीर संकटों को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

उनका साफ कहना था कि कूटनीति की बड़ी-बड़ी बातों से देश की आम जनता का पेट नहीं भरा जा सकता। कौसिकन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी मुसीबत उसके पड़ोसी देश भारत या अफगानिस्तान नहीं हैं, बल्कि वहां के अपने ही राजनेता और ताकतवर सेना हैं जो देश को लगातार गर्त में धकेल रहे हैं।

परमाणु हथियार न होते तो कोई नहीं पूछता

सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सिंगापुर के पूर्व राजदूत ने पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पर गहरा तंज कसा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश बन चुका है जो लगातार पूरी तरह से नाकाम होने यानी फेल स्टेट बनने की कगार पर खड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि आज अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम और परमाणु हथियार नहीं होते, तो पूरी दुनिया उसे पूरी तरह से भुला चुकी होती और कोई भी उसकी परवाह नहीं करता। उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकारों के सामने देश की बदहाल अर्थव्यवस्था और लचर नीतियों का पूरा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया।

कौसिकन ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान अपनी बुनियादी जरूरतों और देश की गाड़ी चलाने के लिए पूरी तरह से बाहरी मदद पर निर्भर है। उन्होंने पाकिस्तान के सामने खड़ी चुनौतियों को कुछ मुख्य बिंदुओं में इस प्रकार स्पष्ट किया:

  • आर्थिक संकट और कर्ज पर निर्भरता: पाकिस्तान लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए IMF और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से मिलने वाले कर्ज और राहत पैकेजों के सहारे ही जीवित है।
  • खाद्य असुरक्षा का गंभीर खतरा: हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान उन देशों की सूची में शीर्ष पर शामिल हो चुका है जहां खाद्य सुरक्षा का संकट बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
  • आंतरिक राजनीतिक कुप्रबंधन: देश की सबसे बड़ी समस्या सीमाओं पर नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक और संस्थागत ढांचे के भीतर छिपी हुई है, जहां जनता के कल्याण से ज्यादा व्यक्तिगत हितों को तरजीह दी जाती है।

पड़ोसी देशों पर दोष मढ़ना केवल एक बहाना

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने यह तर्क देने की कोशिश की कि पाकिस्तान की अधिकांश समस्याओं के लिए भारत और अफगानिस्तान के साथ लगती उसकी सीमाएं जिम्मेदार हैं, तो बिलाहारी कौसिकन ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अपनी हर आंतरिक विफलता का ठीकरा अपने पड़ोसी देशों के सिर पर नहीं फोड़ सकता। उन्होंने कहा कि भौगोलिक स्थिति को अपनी नाकामी छुपाने का जरिया या बहाना नहीं बनाया जा सकता।

पाकिस्तान की सरकार अक्सर यह दलील देती रही है कि भारत, अफगानिस्तान, ईरान और चीन के बीच उसकी भौगोलिक स्थिति उसके विकास में सबसे बड़ी बाधा है। लेकिन सिंगापुर के पूर्व राजनयिक ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान की यह दुर्दशा बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि देश के भीतर लंबे समय से चले आ रहे भारी कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का सीधा नतीजा है।

अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों की कड़वी सच्चाई

बिलाहारी कौसिकन ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच के रिश्तों के भविष्य पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका आने वाले समय में पाकिस्तान पर लगी तमाम पाबंदियों को पूरी तरह से हटा लेगा। हाल के दिनों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की राह आसान बनाकर वॉशिंगटन की नजरों में अपनी छवि को थोड़ा सुधारने की कोशिश जरूर की है, लेकिन इससे दोनों देशों के मूलभूत संबंधों में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है।

उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि इसी वर्ष अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए दी जाने वाली कुछ आव्रजन वीजा प्रक्रियाओं को भी रोक दिया था। कौसिकन के अनुसार, जब तक पाकिस्तान अपने आंतरिक राजनीतिक ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्था और संस्थागत स्वरूप में बड़े और क्रांतिकारी सुधार नहीं करता, तब तक केवल कूटनीतिक उपलब्धियों के दम पर देश की तकदीर बदलना पूरी तरह असंभव है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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