पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब की सीक्रेट डील: डोनाल्ड ट्रंप को अंधेरे में रखकर खेला गया बड़ा कूटनीतिक खेल विश्व एक दिन पहले 18
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच एक हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर डोनाल्ड ट्रंप को धोखा देने और ईरान व सऊदी अरब के साथ मिलकर गुप्त तेल कारोबार चलाने का आरोप लगा है।

पर्दे के पीछे की कहानी: ट्रंप को लगा बड़ा झटका

मध्य पूर्व के अशांत माहौल और चल रहे भयंकर युद्ध के बीच एक ऐसी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिसने वॉशिंगटन के गलियारों में हलचल मचा दी है। यह खुलासा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए किसी कूटनीतिक अपमान से कम नहीं है। इजराइली मीडिया संस्थान द टाइम्स ऑफ इजराइल की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब ने मिलकर एक ऐसा गुप्त समझौता किया है, जिसे जानकर पूरी दुनिया हैरान है। इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य सूत्रधार पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बताए जा रहे हैं, जो ट्रंप के करीबी माने जाते थे। हालांकि, सामने आई रिपोर्ट बताती है कि मुनीर ने सऊदी अरब को सुरक्षा के नाम पर ट्रंप को न केवल अंधेरे में रखा, बल्कि उनकी नीतियों को धता बताते हुए अपना निजी आर्थिक हित भी साधा।

सीक्रेट साठगांठ का खुलासा

रिपोर्ट में तीन प्रमुख अंदरूनी सूत्रों का हवाला दिया गया है, जिनमें एक मध्य पूर्वी राजनयिक, एक क्षेत्रीय खुफिया अधिकारी और एक अन्य सूत्र शामिल हैं। इन लोगों ने दावा किया है कि इस साल मार्च के अंत में आसिम मुनीर ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख अहमद वाहिदी के साथ सीधे संबंध स्थापित कर लिए थे। यह कदम अमेरिकी प्रशासन की सख्त नीतियों के बिल्कुल विपरीत था। जंग की शुरुआत में ईरान समर्थित गुटों ने सऊदी अरब को निशाना बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन इस गोपनीय समझौते के बाद अचानक उन हमलों पर रोक लग गई। वॉशिंगटन में बैठे अमेरिकी नीति निर्माता यह मानकर खुश हो रहे थे कि उनकी धमकियों के कारण ईरान पीछे हट गया है, जबकि सच्चाई कुछ और ही थी।

तेल का अवैध कारोबार और मुनाफाखोरी

इस पूरे मामले की जड़ में पाकिस्तान और ईरान के बीच चल रहा एक संयुक्त तेल परिवहन उद्यम है। रिपोर्ट के अनुसार, आसिम मुनीर और अहमद वाहिदी ने पिछले साल के अंत में मिलकर एक ऐसा वेंचर खड़ा किया, जिसके जरिए ईरानी तेल को गुप्त रास्तों से पाकिस्तान भेजा जाता था। अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, लेकिन इस सीक्रेट बिजनेस ने इन पाबंदियों को चकमा देकर भारी मुनाफा कमाया। पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश किया, जबकि असल में वह अपने रणनीतिक कद को बढ़ाने और अपनी जेबें भरने में व्यस्त था। जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, तब पाकिस्तान ने इसी का लाभ उठाते हुए सऊदी अरब को अपना मोहताज बना लिया।

जब मुनीर ने दी वाहिदी को धमकी

इस डील के तहत तीन महीने तक सऊदी अरब पर कोई बड़ा हमला नहीं हुआ। लेकिन हाल ही में जब तेहरान ने सऊदी अरब की ओर एक मिसाइल दागी, तो आसिम मुनीर को अपना व्यवसाय खतरे में पड़ता नजर आया। एक मध्य पूर्वी राजनयिक ने बताया कि मिसाइल हमले के तुरंत बाद मुनीर ने अहमद वाहिदी को फोन किया और उन्हें सख्त लहजे में चेतावनी दी। मुनीर ने साफ कर दिया कि यदि सऊदी अरब पर आगे हमले जारी रहे, तो उनका यह अरबों का तेल उद्यम रुक जाएगा और उनकी कमाई बंद हो जाएगी। इस धमकी का असर इतना गहरा हुआ कि उस घटना के बाद सऊदी पर दोबारा कोई मिसाइल हमला नहीं हुआ।

डबल गेम से अमेरिका को दिया धोखा

क्षेत्रीय खुफिया अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान की रणनीति दोतरफा थी। वह दुनिया को यह दिखाना चाहता था कि वह सऊदी अरब का रक्षक है और मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि पर्दे के पीछे वह ईरान के साथ मिलकर वही तेल बेच रहा था, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। इस कूटनीतिक चाल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। कई जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान ने एक तरह से ईरान की ब्लैकमेलिंग की शर्तों को स्वीकार कर लिया है। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि ईरान हमले रोकने के बदले में तेल पर रियायतें और आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहा है। पाकिस्तान ने न केवल अमेरिका के दावों को बेअसर कर दिया है, बल्कि अपने निजी स्वार्थ के लिए ट्रंप प्रशासन की नाक के नीचे से यह खेल खेला है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के उन अंधेरे पहलुओं को उजागर किया है, जहां देश अपने फायदों के लिए भरोसे को दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटते।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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