पाकिस्तान: धर्म परिवर्तन का दबाव झेल रही हिंदू युवती रीता की हुई घर वापसी, अदालत ने नजीर के मंसूबों पर फेरा पानी विश्व 2 घंटे पहले 4
पाकिस्तान के सिंध प्रांत की 21 वर्षीय हिंदू युवती रीता को अदालत ने उसके परिवार के पास सुरक्षित भेज दिया है। उस पर शादी के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने उसने अपने माता-पिता के साथ जाने का फैसला सुनाया।

सिंध की बेटी की सुरक्षित घर वापसी

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाले एक हिंदू परिवार के लिए बीते कई दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। 21 वर्षीय हिंदू युवती रीता के लापता होने के बाद से ही उसके माता-पिता और भाई गहरे सदमे में थे। अब इस मामले में एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां अदालत ने रीता को उसके परिवार के पास वापस जाने की अनुमति दे दी है। रीता पिछले सप्ताह रहस्यमयी परिस्थितियों में अपने घर से लापता हो गई थी, जिसके बाद से उसके घर में कोहराम मचा था।

क्या था पूरा मामला और अपहरण का आरोप

रीता के भाई रविशंकर ने इस पूरे मामले में गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी बहन को बहला-फुसलाकर घर से दूर ले जाया गया। उनके अनुसार, सिंध के संघार जिले की खिपरो तहसील स्थित राणा राजपूत कॉलोनी से 24 अगस्त को रीता अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने जब घर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, तो उसमें कुछ संदिग्ध लोग रीता को कीमती सामान और मोबाइल फोन के साथ ले जाते हुए साफ नजर आए थे।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पता चला कि रीता को उसके घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब के गुजरांवाला ले जाया गया है। आरोप है कि वहां रीता पर जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार करने और नज़ीर हुसैन नामक व्यक्ति से निकाह करने का दबाव बनाया गया। नज़ीर हुसैन पहले से ही शादीशुदा बताया गया है, जिससे इस मामले की जटिलता और भी अधिक बढ़ गई थी।

अदालत में पलटा पूरा घटनाक्रम

पंजाब पुलिस ने छापेमारी के दौरान रीता को बरामद कर लिया और सोमवार को उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने एक अजीबोगरीब दलील दी। अधिकारी ने अदालत को सुझाव दिया कि रीता अपने माता-पिता के पास लौटने की इच्छुक नहीं है, इसलिए उसे सरकारी महिला आश्रय गृह दारुल-अमान भेज दिया जाना चाहिए।

हालांकि, रीता के वकीलों असद जमाल और खेता राम ने इस दलील का पुरजोर विरोध किया। वकीलों ने अदालत को स्पष्ट रूप से सूचित किया कि रीता अपने परिवार के साथ वापस जाना चाहती है और उसका भाई रविशंकर भी अदालत में मौजूद है। मामले का सबसे निर्णायक मोड़ तब आया जब मजिस्ट्रेट ने रीता से शपथ के तहत उसका बयान दर्ज करने को कहा। रीता ने अदालत के समक्ष निडर होकर बयान दिया कि वह किसी के दबाव में नहीं है और स्वेच्छा से अपने माता-पिता के घर वापस जाना चाहती है।

कानूनी आदेश और सुरक्षा की जिम्मेदारी

युवती का बयान दर्ज करने के बाद मजिस्ट्रेट ने बिना देरी किए उसे उसके भाई के साथ घर जाने की अनुमति दे दी। अदालत ने रीता के भाई रविशंकर को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वह अपनी बहन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसे सकुशल संघार स्थित उनके पैतृक घर तक पहुंचाए। इस फैसले से रीता के परिवार ने राहत की सांस ली है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

रीता की घर वापसी एक सुखद अंत की तरह जरूर दिख रही है, लेकिन यह मामला पाकिस्तान में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी खड़ा करता है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्टों के अनुसार, देश में हर साल अल्पसंख्यक समुदायों की कई युवतियों को अपहरण, दबाव या अन्य प्रताड़नाओं के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर शादी को ढाल बनाकर लड़कियों की जिंदगी को खतरे में डाला जाता है। रीता का मामला भले ही सुखद तरीके से हल हो गया हो, लेकिन इस तरह की घटनाएं समाज में डर का माहौल पैदा करती हैं। अपने घर की दहलीज पर वापस लौटी रीता अब अपने परिवार के बीच सुरक्षित है, लेकिन यह घटना पाकिस्तान में कानून और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार उठते सवालों का एक और उदाहरण बनकर सामने आई है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप