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एक घंटा पहले
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PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान की बड़ी चाल
दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक नक्शे पर जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पाकिस्तान के हुक्मरानों के बीच पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर एक नई हलचल तेज हो गई है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस्लामाबाद इन दोनों विवादास्पद इलाकों को अंतरिम तौर पर प्रांत जैसा दर्जा देने के एक गंभीर प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस पूरे खाके को अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है, लेकिन पाकिस्तान सरकार द्वारा संविधान में बदलाव के संकेत मिलने से हड़कंप मच गया है।
अगस्त 2019 के बाद से ही पाकिस्तान में खौफ
पाकिस्तान की इस बेचैनी के पीछे का असली कारण अगस्त 2019 में भारत द्वारा उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। भारत ने जब अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठित किया, तभी से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले 7 सालों से इस्लामाबाद एक गहरे राजनीतिक दबाव और डर के साये में जी रहा है। उसे लगता है कि इन इलाकों पर अपना नियंत्रण कानूनी रूप से पुख्ता करने के लिए उसे अपनी रणनीति बदलनी होगी।
संविधान संशोधन की तैयारी और अनुच्छेद 1(2) का पेंच
पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में चर्चा है कि सरकार 28वें संविधान संशोधन को लाने की तैयारी कर रही है। इसके माध्यम से PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की संवैधानिक स्थिति को बदला जा सकता है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान अपने संविधान के अनुच्छेद 1(2) में भी बड़ा फेरबदल करने पर मंथन कर रहा है, जो देश की भौगोलिक सीमाओं को परिभाषित करता है। दशकों से पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों को अपने आधिकारिक प्रांतों से अलग दर्जा दे रखा था, लेकिन अब इस दशकों पुरानी कश्मीर नीति को पूरी तरह पलटने की बिसात बिछाई जा रही है।
भारत-चीन की बढ़ती दोस्ती से इस्लामाबाद डरा
इस अचानक बढ़ी हलचल का सीधा संबंध भारत और चीन के बीच सुधरते रिश्तों और सीमा विवाद पर चल रही बातचीत से है। पाकिस्तान इस्लामाबाद में बैठकर नई दिल्ली और बीजिंग के बीच हो रही वार्ताओं पर पैनी नजर रखे हुए है। पाकिस्तान को डर है कि यदि भारत और चीन सीमा विवाद पर किसी बड़े समझौते तक पहुंच जाते हैं, तो पूरे क्षेत्रीय संतुलन का समीकरण पूरी तरह से बदल जाएगा।
यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि 1963 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जाई गई शक्सगाम घाटी चीन को सौंप दी थी, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करता है। पाकिस्तान के लिए स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब उसे लगता है कि चीन के साथ उसकी पुरानी दोस्ती पर भारत-चीन के बढ़ते संबंध असर डाल सकते हैं। इसी रणनीतिक पहेली से बचने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत दिखाने के लिए पाकिस्तान अब इन क्षेत्रों का दर्जा बदलने का दांव चल रहा है।
क्या बदलेगी दक्षिण एशिया की स्थिति?
अगर पाकिस्तान इस कदम को अमलीजामा पहनाता है, तो यह उसकी कश्मीर नीति में एक बड़ा मोड़ होगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सरकार इस प्रस्ताव को सफलतापूर्वक लागू कर पाएगी। पाकिस्तान की यह कोशिश अपनी आंतरिक असुरक्षा और भारत के खिलाफ अपनी पकड़ बनाए रखने की छटपटाहट को दर्शाती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस्लामाबाद वाकई संविधान में बदलाव का जोखिम उठाएगा या यह मात्र कूटनीतिक दबाव बनाने की एक और असफल कोशिश साबित होगी।
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