बलूचिस्तान में सुरक्षा नाकामी पर बौखलाए आसिम मुनीर, सैन्य अफसरों को दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम विश्व एक महीने पहले 69
पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में लगातार हो रहे हमलों के कारण सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अपने खुफिया और सैन्य अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें अपना काम सुधारने या पद छोड़ने की चेतावनी दी है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सेना मुख्यालय में हलचल

पाकिस्तान के अस्थिर इलाके बलूचिस्तान में जारी हमलों और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने वहां की सरकार और सेना की नींद उड़ा दी है। सुरक्षा के मोर्चे पर मिल रही लगातार नाकामी से पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बेहद नाराज हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि सेना के आला अधिकारियों की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आसिम मुनीर ने अपने खुफिया और सैन्य अधिकारियों को 72 घंटे का स्पष्ट अल्टीमेटम जारी कर दिया है। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा है कि या तो बलूचिस्तान के हालात को पूरी तरह से नियंत्रित करें, या फिर अपना बोरिया-बिस्तर समेटने के लिए तैयार रहें।

उच्च स्तरीय बैठक में मंथन

बलूचिस्तान में पैदा हुए इस विकट संकट के समाधान के लिए क्वेटा में एक उच्च स्तरीय एपेक्स कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने संयुक्त रूप से की। बैठक का मुख्य एजेंडा बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड जैसे उग्रवादी संगठनों को जड़ से खत्म करना था। सरकार और सेना ने इन संगठनों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने का संकल्प लिया है ताकि बलूचिस्तान में सरकारी नियंत्रण फिर से स्थापित किया जा सके।

बड़े सैन्य अभियान की तैयारी

खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना अब बलूचिस्तान में इन विद्रोही संगठनों के खिलाफ एक बड़े और व्यापक सैन्य अभियान की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना को आश्वस्त किया है कि इस अभियान के लिए सरकार हर संभव मदद और फंड उपलब्ध कराएगी। इस रणनीतिक बदलाव के तहत, आने वाले समय में बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल की उम्मीद है। इसके साथ ही आईएसआई और मिलिट्री इंटेलिजेंस के कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले भी किए जा सकते हैं ताकि सुरक्षा तंत्र को फिर से सक्रिय किया जा सके।

चीन के दबाव में पाकिस्तान

आसिम मुनीर की इस नाराजगी और घबराहट के पीछे केवल स्थानीय उग्रवाद ही नहीं, बल्कि चीन का बढ़ता हुआ दबाव भी एक प्रमुख कारण है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा और बलूचिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट चीन के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और मौजूदा हमलों के कारण ये खतरे में हैं। हाल के समय में बीएलए और मजीद ब्रिगेड ने जिस तरह से चीनी नागरिकों और उनके प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाया है, उससे बीजिंग का धैर्य समाप्त होता जा रहा है। चीन ने पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी है कि यदि गलियारे को सुरक्षित नहीं किया गया, तो वे अपनी फंडिंग रोक देंगे। इसके अलावा चीन ने अपनी खुद की प्राइवेट सिक्योरिटी फोर्स पाकिस्तान की धरती पर तैनात करने की मांग भी की है, जो पाकिस्तानी सेना के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

पाकिस्तानी सेना की विफलता के कारण

इस संकट के गहराने के पीछे सबसे बड़ा कारण बलूच विद्रोहियों के सटीक और घातक हमले हैं। विद्रोही न केवल सेना के मजबूत चेकपोस्टों को धता बता रहे हैं, बल्कि वे सेना की हर चाल और रणनीति का पहले से ही अनुमान लगा लेते हैं। इसके विपरीत, पाकिस्तानी सेना के पारंपरिक तौर-तरीके अब बलूचिस्तान में पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहे हैं। सेना इस समय तीन अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ उलझी हुई है, जिससे उनकी पकड़ लगातार कमजोर होती जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सेना की ओर से अगले हफ्ते शुरू की जाने वाली नई रणनीति क्या इन चुनौतियों का सामना कर पाएगी या बलूचिस्तान का संकट और अधिक विकराल रूप लेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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