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3 घंटे पहले
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बलूचिस्तान में फिर बढ़ा तनाव
पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत एक बार फिर हिंसा और मानवीय संकट के केंद्र में है। हालिया घटनाओं में सामने आया है कि वहां के निवासियों को आंसुओं और खौफ के साये में जीने को मजबूर किया जा रहा है। बलूच वॉयस फॉर जस्टिस यानी बीवीजे और बलूच यकजेहती कमेटी यानी बीवाईसी जैसे संगठनों ने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सैन्य कार्रवाई के नाम पर वहां के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
खुजदार में ड्रोन हमले से दहशत
खुजदार जिले के जेहरी इलाके से आई खबरें बेहद विचलित करने वाली हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि रिहायशी इलाके को निशाना बनाकर किए गए एक ड्रोन हमले में एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई है। संगठन के मुताबिक, महिला उस समय पानी भरने के लिए बाहर निकली थी, तभी यह हमला हुआ। इस घटना में एक अन्य महिला समेत कुल दो लोग घायल हुए हैं। स्थानीय स्तर पर इंटरनेट सेवाओं के बंद होने और संचार माध्यमों पर लगे प्रतिबंधों के कारण मृतकों और घायलों की सटीक पहचान करना मुश्किल बना हुआ है।
25 लोगों की जबरन गुमशुदगी
जेहरी इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात के बीच करीब 25 स्थानीय निवासियों के अचानक गायब होने की खबर ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इन लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन उसके बाद से उनका कहीं कोई अता-पता नहीं है। संचार ब्लैकआउट के कारण इन परिवारों का संपर्क दुनिया से पूरी तरह कट चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पीड़ित परिवार अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी तक नहीं जुटा पा रहे हैं। संगठन का कहना है कि सैन्य घेराबंदी के चलते वहां हो रहे अत्याचारों की वास्तविक तस्वीरें दुनिया के सामने नहीं आ पा रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों की कड़ी मांग
बीवीजे ने नागरिकों को निशाना बनाए जाने और जबरन गायब करने के मामलों को एक गंभीर संकट बताया है। इंटरनेट और फोन सेवा पर रोक लगाने को भी बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन माना गया है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं से मांग की है कि जेहरी के हालातों की एक स्वतंत्र जांच करवाई जाए। साथ ही पाकिस्तान सरकार से यह जवाब मांगा गया है कि आखिर लापता 25 लोग कहां हैं और उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया गया है।
तुरबत में सड़कों पर प्रतिबंध का विरोध
बलूचिस्तान के तुरबत में भी तनाव का दूसरा मोर्चा खुल गया है। बीवाईसी ने आरोप लगाया है कि केवल कुछ चुनिंदा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को वीआईपी सुरक्षा देने के लिए शहर की मुख्य सड़कों को घंटों तक बंद रखा गया। इस कदम से आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल जाने वाले मरीज, डॉक्टर और जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी सड़कों पर फंसे रहे, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
डॉक्टर पर राइफल तानने का सनसनीखेज आरोप
मामला तब और अधिक हिंसक हो गया जब आम लोगों ने सड़कों की नाकेबंदी का विरोध करना शुरू किया। बीवाईसी का दावा है कि जब मरीजों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने रास्ते खोलने की मांग की, तो फ्रंटियर कॉर्प्स के जवानों ने उनके साथ बदसलूकी की। संगठन के मुताबिक, एक डॉक्टर पर सीधे राइफल तान दी गई और उसे गोली मारने की धमकी दी गई। इस दौरान वहां मौजूद आम नागरिकों में एक गर्भवती महिला भी शामिल थी। इस घटना के विरोध में तुरबत टीचिंग अस्पताल के सभी डॉक्टर, चिकित्सा कर्मी और मरीजों ने काम का बहिष्कार कर दिया। वे सुरक्षा बलों की इस बर्बरता के खिलाफ सड़कों पर उतर आए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
सुरक्षा के नाम पर कब तक चलेगा ये सिलसिला?
बीवाईसी ने यह बड़ा सवाल उठाया है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा के नाम पर आम लोगों की आवाजाही को कब तक सीमित रखा जाएगा। एक ओर स्थानीय लोगों को उनके ही मोहल्लों में कैद किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बाहरी लोगों के लिए कथित तौर पर एक फर्जी नैरेटिव गढ़ा जा रहा है ताकि हकीकत को छिपाया जा सके। बलूचिस्तान में सैन्य अभियानों, जबरन गुमशुदगी और नागरिक अधिकारों के हनन को लेकर दशकों से सवाल उठते रहे हैं। इन ताजा घटनाओं ने एक बार फिर इस बहस को जन्म दे दिया है कि एक संप्रभु देश की सेना अपने ही नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकती है और सैन्य सुरक्षा के बीच आम आदमी के अधिकारों की रक्षा का रास्ता क्या होगा।
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