बलूचिस्तान में फिर बरपा पाकिस्तानी सेना का कहर, बुलडोजर से ढहाए 10 घर और की गई लोगों की धरपकड़ विश्व एक महीने पहले 73
पाकिस्तान के ग्वादर जिले के जीवानी इलाके में सुरक्षा बलों पर बलूच नागरिकों के घरों को तोड़ने और बड़े पैमाने पर स्थानीय निवासियों को हिरासत में लेने का आरोप लगा है।

ग्वादर में दहशत का माहौल

बलूचिस्तान एक बार फिर पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के कारण चर्चा में है। ताजा मामला ग्वादर जिले के जीवानी इलाके से सामने आया है, जहाँ के पनवान गांव में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर बुलडोजर का इस्तेमाल कर 10 बलूच परिवारों के घरों को मिट्टी में मिला दिया है। बलूच सूत्रों का कहना है कि यह घटना 6 जुलाई को अंजाम दी गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, घर तोड़ने के अलावा सुरक्षा बलों ने इलाके के कई नागरिकों को भी हिरासत में लिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में डर का माहौल व्याप्त है।

सुरक्षा अभियानों की आड़ में दमन

इस पूरी कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण हाल ही में जीवानी इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हुए हमलों को बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हमलों के जवाब में सेना ने अपना सुरक्षा अभियान तेज कर दिया है, लेकिन इसका निशाना आम नागरिक बन रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके घर ही नहीं उजड़े, बल्कि उन्हें जबरन हिरासत में भी लिया गया है। इस पूरे मामले पर पाकिस्तान सरकार या उसकी सेना की ओर से फिलहाल कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

चीन और विदेशी परियोजनाओं का साया

बलूचिस्तान में घरों को ध्वस्त करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट जैसे संगठनों ने दावा किया है कि बलूचिस्तान के नुश्की, अहमदवाल, कलात और डेरा बुगती जैसे इलाकों में भी इसी तरह की सैन्य कार्रवाई की गई है। जानकारों का यह भी आरोप है कि इन इलाकों को विदेशी कंपनियों और चीन से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं के लिए खाली कराया जा रहा है ताकि वहां अपना कब्जा जमाया जा सके। इसके अलावा, हाल ही में पाकिस्तानी सेना पर बलूच समुदाय के 100 से अधिक पशुओं को मारने के भी गंभीर आरोप लगे थे।

हिरासत में मौतों का सिलसिला

घर ढहाने की खबरों के बीच, बलूचिस्तान में हिरासत में बंद लोगों की मौत का आंकड़ा भी चिंता का विषय बना हुआ है। कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान की हिरासत में चार बलूच बंदियों की मौत की खबर सामने आई थी, जिनमें स्कूल प्रिंसिपल खालिक दाद बलोच भी शामिल थे। उसी दिन इलाके से तीन अन्य स्थानीय युवकों के शव भी बरामद किए गए थे, जिसने बलूच समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

प्रभावित परिवारों की आपबीती

पनवान गांव के प्रभावित परिवारों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके घरों को बुलडोजर से पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। इन घरों में मुहम्मद जान कलमती, खालिद कलमती, जाफर कलमती, गुलाम नबी कलमती और यार जान कलमती के परिवार रहते थे। गुलाम नबी कलमती का तो सात कमरों वाला घर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है। परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान उनके घर का सामान सड़कों पर फेंक दिया गया और उनका एक वाहन भी जब्त कर लिया गया। परिवारों द्वारा जारी की गई तस्वीरों में घरों की जर्जर हालत और तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। इससे पहले नुश्की और पंजगुर जैसे इलाकों में भी इस तरह के दमनकारी अभियान देखे गए हैं, जिन्हें स्थानीय आबादी को डराने और उन्हें विस्थापित करने की सोची समझी साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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