हरियाणा
एक घंटा पहले
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विचारों
हरियाणा की पहचान अब केवल खेती-बाड़ी तक सीमित नहीं रह गई है। राज्य में पशुपालन भी गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने वाला एक बड़ा जरिया बनकर उभरा है। प्रदेश के हजारों किसान और ग्रामीण परिवार डेयरी, भेड़-बकरी पालन और सूअर पालन के माध्यम से अपनी कमाई में इजाफा कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन के मामले में हरियाणा आज देश के अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल है।
ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पशुपालन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार लगातार नई-नई योजनाएं संचालित कर रही है। इन्हीं योजनाओं के तहत पशुपालकों को लाखों रुपये का लोन और 25 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
क्या है पशुधन इकाई स्थापना योजना
इस संबंध में अंबाला पशुपालन एवं डेयरी विभाग के एसडीओ डॉ. सुदेश कुमार ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से पशुधन इकाई स्थापना योजना चलाई जा रही है, जिसका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पशुपालन को एक व्यवसाय के रूप में अपनाएं।
उन्होंने कहा कि इच्छुक पशुपालक सरल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और मिनी डेयरी से भी अपने कारोबार की शुरुआत कर सकते हैं। डॉ. सुदेश कुमार के अनुसार विभाग का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर देना और गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।
50 प्रतिशत तक मिलता है अनुदान
इसी क्रम में विभाग द्वारा डेयरी, भेड़-बकरी पालन और सूअर पालन के लिए अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से बैंक लोन उपलब्ध कराया जाता है। सामान्य वर्ग के पशुपालकों को दो गाय या दो भैंसों की इकाई पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों को 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है।
डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि सामान्य वर्ग के लोग दो पशुओं से लेकर 100 पशुओं तक के लिए लोन ले सकते हैं, जिस पर विभाग की ओर से 25 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। हालांकि इसके लिए बैंक की ओर से सिक्योरिटी भी ली जाती है। सूअर पालन के लिए 11 पशुओं की इकाई तय की गई है, जिस पर सामान्य वर्ग को 25 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता है।
एक पशु पर 85 हजार तक का लोन
उन्होंने बताया कि योजना के तहत एक पशु पर करीब 85 हजार रुपये तक का लोन दिया जाता है। इस तरह दो पशुओं पर पशुपालक को 1 लाख 70 हजार रुपये तक का लोन मिल सकता है। खास बात यह है कि अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को इसमें सिर्फ 85 हजार रुपये ही चुकाने पड़ते हैं, जबकि बाकी रकम सब्सिडी के रूप में माफ कर दी जाती है।
“पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर लाभ
डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि यह योजना “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर संचालित की जाती है, क्योंकि हर जिले को विभाग की ओर से एक तय लक्ष्य दिया जाता है। प्रत्येक जिले में लगभग 20 लाख रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है, जिसके अनुरूप पात्र पशुपालकों को लाभ दिया जाता है। जो लोग किसी वजह से इस बार योजना का फायदा नहीं उठा पाते, उन्हें अगली सूची में प्राथमिकता दी जाती है।
जरूरी योग्यता और दस्तावेज
इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदक का हरियाणा का मूल निवासी होना अनिवार्य है और उसकी आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हरियाणा सरल पोर्टल पर आवेदन के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं की गई है, लेकिन पशुपालन से जुड़ा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है।
आवेदन करते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, परिवार पहचान पत्र, बैंक खाते का कैंसिल चेक और बैंक का अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा कराना आवश्यक होगा।
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