उत्तर प्रदेश
59 मिनट पहले
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने सरकारी अस्पताल के डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इलाज के एवज में पैसे मांगे गए और बाद में गलत ढंग से इलाज कर उसकी मासूम बेटी के पैर को नुकसान पहुंचाया गया। पीड़ित मां अपनी 14 साल की बेटी को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंची है और न्याय की गुहार लगा रही है। बताया जा रहा है कि बच्ची मानसिक रूप से अस्वस्थ है।
इलाज के नाम पर मांगे गए 25000 रुपये
पीड़ित मां रेशमा का कहना है कि करीब डेढ़ महीने पहले उसने अपनी बेटी के दाहिने पैर का ऑपरेशन जिला अस्पताल में कराया था। इसके लिए अस्पताल कर्मियों ने 25000 रुपये की मांग की। महिला ने खुद को विधवा बताते हुए इतनी रकम देने में असमर्थता जताई, तो कर्मियों ने इलाज करने से ही इनकार कर दिया।
इसके बाद महिला ने जिलाधिकारी के यहां अर्जी लगाई, जिस पर डीएम ने सीएमओ को मुफ्त इलाज के निर्देश दिए। बावजूद इसके अस्पताल कर्मियों ने 8000 रुपये ले लिए और कहा कि बाकी की रकम बाद में चुकानी होगी।
चेकअप के बहाने बुलाकर तोड़ा घुटना
आरोप है कि कुछ दिन बाद डॉक्टर ने महिला को दोबारा चेकअप के लिए बुलाया, ताकि बच्ची का घुटना मुड़ सके। जब महिला अपनी बेटी को लेकर अस्पताल पहुंची, तो जिस डॉक्टर ने ऑपरेशन किया था, उसी ने बच्ची का घुटना जबरन मोड़ दिया।
इस दौरान दर्द से बच्ची चीख पड़ी और पैर से हड्डी टूटने की आवाज तक सुनाई दी। आरोप है कि इसके बाद भी डॉक्टरों ने मां-बेटी को वहां से भगा दिया। महिला ने डॉक्टर से शिकायत की, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।
क्या बोले सीएमओ
इस घटना को लेकर जिले के सीएमओ सुनील तेवतिया का बयान भी सामने आया है। उनका कहना है कि दूसरे पक्ष का पक्ष सुने बिना इस मामले में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। अगर जांच में अस्पताल कर्मियों या डॉक्टरों की किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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