कराची पोर्ट पर भारत का दबदबा, कैसे समंदर के रास्ते पाकिस्तान को घुटनों पर ला सकती है भारतीय नौसेना पाकिस्तान एक घंटा पहले 4
उत्तर अरब सागर में पाकिस्तानी जहाज द्वारा भारतीय युद्धपोत को टक्कर मारने की घटना के बाद भारत की समुद्री ताकत और पाकिस्तान की सामरिक कमजोरी पर चर्चा तेज हो गई है।

समुद्र में पाकिस्तान की बड़ी चूक

हाल ही में उत्तर अरब सागर में एक बेहद गंभीर घटना सामने आई, जहां पाकिस्तान के एक जहाज ने भारतीय युद्धपोत को टक्कर मार दी। इस घटना के बाद भारतीय रक्षा तंत्र ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तानी अधिकारी को तलब किया और इस लापरवाही पर अपना कड़ा ऐतराज दर्ज कराया। यह घटना न केवल समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती घबराहट और भारत की सतर्कता को भी प्रदर्शित करती है।

कराची पोर्ट पर टिकी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की पूरी आर्थिक रीढ़ समंदर के रास्ते पर निर्भर है। पाकिस्तान का करीब 80 से 90 फीसदी व्यापार और तेल की आपूर्ति केवल कराची पोर्ट के जरिए होती है। यह बंदरगाह सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन भौगोलिक स्थिति के कारण यह पूरी तरह से भारतीय नौसेना की पहुंच और निशाने के दायरे में है। यदि किसी भी विपरीत स्थिति में भारत इस समुद्री रास्ते को बंद कर देता है, तो पड़ोसी मुल्क की कमर टूटनी तय है।

ऑपरेशन ट्राइडेंट का खौफ आज भी बरकरार

पाकिस्तानी सेना और नौसेना के भीतर 1971 के युद्ध के दौरान चलाए गए ऑपरेशन ट्राइडेंट का डर आज भी साफ देखा जा सकता है। उस दौरान भारतीय नौसेना ने जिस तरह से कराची बंदरगाह को निशाना बनाया था, उसकी यादें आज भी पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को बेचैन कर देती हैं। रणनीतिकारों का दावा है कि अगर भारत आज भी समुद्री नाकेबंदी जैसी सख्त रणनीति अपनाता है, तो महज 15 दिनों के भीतर पाकिस्तान में ईंधन और राशन का भंडार पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

बिना युद्ध के भी हो सकती है घेराबंदी

समुद्री मार्ग पर भारत का वर्चस्व इतना अधिक है कि युद्ध जैसी स्थिति में भारत को एक भी गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि केवल व्यावसायिक गतिविधियों और तेल टैंकरों के रास्तों को ब्लॉक कर दिया जाए, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कुछ ही हफ्तों में तबाही की कगार पर पहुंच सकती है। यही कारण है कि समंदर में भारत के बढ़ते कदम पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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