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12 घंटे पहले
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इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
पाकिस्तान की राजनीति और न्यायपालिका से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। जेल की सलाखों के पीछे बंद देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार के कड़े रुख को दरकिनार करते हुए इमरान खान को तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश जारी किया है। इमरान खान का स्वास्थ्य पिछले काफी समय से जेल के भीतर बेहद खराब चल रहा था। उनके गिरते स्वास्थ्य को लेकर न केवल उनका परिवार, बल्कि देश-विदेश में मौजूद उनके समर्थक और उनकी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता अत्यंत चिंतित थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत की सांस लेकर आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इमरान खान को आगामी 48 घंटों के भीतर इस्लामाबाद के अत्यंत प्रतिष्ठित अस्पताल शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इस महत्वपूर्ण फैसले को सुनाने वाली तीन सदस्यीय बेंच का नेतृत्व जस्टिस शाहिद वाहीद कर रहे थे। रोचक बात यह है कि इस फैसले के बाद जस्टिस शाहिद वाहीद का नाम मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बेहद चर्चा में आ गया है, क्योंकि उनका इमरान खान के कानूनी इतिहास से एक पुराना और दिलचस्प नाता रहा है।
अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश और अन्य सहूलियतें
जस्टिस शाहिद वाहीद के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की इस तीन सदस्यीय बेंच ने अपने विस्तृत आदेश में साफ किया कि यह निर्णय केवल किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह से कैदी की सेहत, उसकी व्यक्तिगत सुरक्षा और बुनियादी मौलिक मानवाधिकारों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि इमरान खान के इलाज की लगातार और गहन निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। इस मेडिकल बोर्ड में देश के जाने-माने विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही, अदालत ने इमरान खान के परिवार को राहत देते हुए यह भी कहा कि इस बोर्ड में उनके निजी डॉक्टर को भी शामिल किया जा सकता है, ताकि उनके इलाज की प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह न रहे।
इस फैसले में केवल इलाज की ही बात नहीं है, बल्कि अदालत ने इमरान खान को कुछ ऐसी रियायतें भी दी हैं जो उन्हें लंबे समय से जेल में नहीं मिल रही थीं। इस आदेश के तहत, अस्पताल में इलाज के दौरान इमरान खान हर हफ्ते अपने परिवार के सदस्यों से आमने-सामने मुलाकात कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें अपने बेटों से टेलीफोन पर सीधे बातचीत करने की भी मंजूरी दी गई है। इमरान खान की राजनीतिक पार्टी, PTI ने सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का तहे दिल से स्वागत किया है और इसे न्याय की एक बड़ी जीत करार दिया है।
कौन हैं जस्टिस शाहिद वाहीद?
इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में राहत देने वाले फैसले के बाद जस्टिस शाहिद वाहीद का नाम पूरे पाकिस्तान में चर्चा का केंद्र बन गया है। जस्टिस शाहिद वाहीद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ और तजुर्बेकार न्यायाधीशों में शुमार किए जाते हैं। उच्चतम न्यायालय में अपनी सेवाएं देने से पहले, वे लाहौर हाई कोर्ट में एक लंबे समय तक न्यायाधीश के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। उनके पास दीवानी (सिविल), सरकारी सेवा और संवैधानिक मामलों से जुड़े जटिल मुकदमों का एक विशाल और गहरा न्यायिक अनुभव है।
उनकी न्यायिक यात्रा पर नजर डालें तो उनके करियर की महत्वपूर्ण तारीखें इस प्रकार हैं:
- 27 मार्च 2012: इस तारीख को शाहिद वाहीद ने लाहौर हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी, जहां उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए।
- 11 नवंबर 2022: उनके बेहतरीन काम और न्यायिक सूझबूझ को देखते हुए उन्हें पदोन्नत कर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
साल 2019 का वह किस्सा: जब सुनवाई से किया था इनकार
जस्टिस शाहिद वाहीद का नाम इमरान खान के साथ जुड़ने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले साल 2019 में भी उनका सामना इमरान खान से जुड़े एक बेहद चर्चित और विवादित मामले से हुआ था। वह दौर था जब जस्टिस शाहिद वाहीद लाहौर हाई कोर्ट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उस समय इमरान खान के खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें उन्हें प्रधानमंत्री पद और संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। इस याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि इमरान खान ने साल 2018 के आम चुनाव के दौरान अपने नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी कथित बेटी टाइरियन व्हाइट से संबंधित महत्वपूर्ण और कानूनी जानकारी को छिपाया था।
जब यह मामला सुनवाई के लिए जस्टिस शाहिद वाहीद की अदालत में पहुंचा, तो उन्होंने एक बड़ा कदम उठाते हुए खुद को इस केस की सुनवाई से पूरी तरह अलग कर लिया था। उन्होंने इस मामले पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या सुनवाई करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद इस पूरे मामले की फाइल को एक नई और दूसरी बेंच के गठन के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के पास वापस भेज दिया गया था।
फैसले के राजनीतिक मायने
लगभग 7 साल पहले जिस न्यायाधीश ने इमरान खान के राजनीतिक भविष्य से जुड़े एक बड़े मामले की सुनवाई करने से खुद को पीछे खींच लिया था, आज उसी न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इमरान खान को उनके जीवन और स्वास्थ्य के मोर्चे पर सबसे बड़ी न्यायिक राहत प्रदान की है। यही वजह है कि आज पूरे पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक और कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले और जस्टिस वाहीद के रुख की गहराई से चर्चा कर रहे हैं। इस फैसले ने न केवल इमरान खान के समर्थकों को बड़ी उम्मीद दी है, बल्कि देश की वर्तमान शहबाज सरकार की नीतियों पर भी न्यायपालिका के कड़े रुख को स्पष्ट कर दिया है।
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