भारत
10 घंटे पहले
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विचारों
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर बर्बरता की हदें पार कर दीं। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें 35 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। इस खूनी घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। PoK में आंदोलन की अगुवाई कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने रावलकोट में एक अंतिम संस्कार के लिए जुटे लोगों पर सीधे फायरिंग की, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। पाकिस्तानी सेना की इस हिंसा को लेकर अब भारत सरकार का बयान भी सामने आ गया है।
कब और कहां हुई गोलीबारी?
दरअसल, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC पर पाबंदी लगाए जाने के खिलाफ PoK में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जारी हैं। इसी आंदोलन के दौरान रावलकोट में शाहजैब हबीब नाम के एक प्रदर्शनकारी की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी। इसके बाद भारी संख्या में लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लोग अस्पताल के बाहर शोक मनाने के लिए एकत्र हुए थे। इसी बीच सुरक्षा बलों ने शोकाकुल भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 200 लोग घायल हुए। JAAC के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों पर सीधे गोली चलाने के आदेश दिए गए थे।
भारत सरकार ने क्या कहा?
PoK में जारी पाकिस्तानी बर्बरता पर भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस संदर्भ में पाकिस्तान की ओर से फर्जी खबरों और वीडियो का सिलसिला लगातार देखने को मिल रहा है।
यह अपनी विफलताओं को छिपाने और अपने मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशा भरा प्रयास है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भीषण पुलिस बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।
JAAC पर कार्रवाई क्यों?
JAAC के लोग आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं और महंगाई तथा भ्रष्टाचार जैसे सवालों पर लगातार प्रदर्शन करते आए हैं। इस संगठन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की तथाकथित विधानसभा में शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित किए जाने का विरोध किया था। JAAC की मांग है कि इन आरक्षित सीटों को खत्म किया जाए, क्योंकि ये सीटें कश्मीर से आए लोगों के लिए रिजर्व की गई हैं, जिन पर पाकिस्तान के मुख्य राजनीतिक दलों ने कब्जा जमा रखा है। इन्हीं मांगों के चलते पाकिस्तान ने JAAC पर शिकंजा कसा है।
ब्रिटेन के 30 सांसदों ने खोला मोर्चा
तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान PoK के लोगों की आवाज को दबा नहीं पा रहा है। प्रदर्शन सिर्फ रावलकोट और मुजफ्फराबाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों पर हो रहे दमन की गूंज सात समंदर पार तक पहुंच गई है। इंग्लैंड के ब्रेडफोर्ड में पाकिस्तान कंसुलेट के बाहर PoK के लोग बैनर और पोस्टर लेकर जुटे और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इतना ही नहीं, ब्रिटेन के 30 सांसदों ने भी PoK के लोगों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की है। इन सांसदों ने पत्र लिखकर ब्रिटिश सरकार से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने लोगों पर हुई फायरिंग को बर्बर बताते हुए इसे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
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