धान की खेती में खाद का सही गणित, नाइट्रोजन और जिंक का ऐसा इस्तेमाल बना देगा मालामाल छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 75
धान की फसल में उर्वरकों का सही प्रबंधन पैदावार बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, कृषि वैज्ञानिकों ने नाइट्रोजन, फास्फोरस और जिंक देने का सटीक तरीका बताया है।

उर्वरक प्रबंधन से बढ़ाएं धान की उपज

धान की रोपाई के बाद की गई छोटी सी लापरवाही पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है। अक्सर किसान खाद डालने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिसका सीधा असर फसल की बढ़वार और दाने की गुणवत्ता पर पड़ता है। अगर किसान भाई सही समय पर और उचित मात्रा में यूरिया, डीएपी, पोटाश और जिंक का उपयोग करना सीख जाएं, तो वे धान की पैदावार को कई गुना बढ़ा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए खाद प्रबंधन का एक खास फॉर्मूला तैयार किया है, जिसे अपनाकर उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की जा सकती है।

संतुलित खाद से होगा फायदा

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में इन दिनों धान की रोपाई पूरे जोर-शोर से चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ रोपाई कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके बाद पौधों को सही पोषण देना भी जरूरी है। सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम के अनुसार, धान की फसल में खाद का असंतुलित उपयोग नहीं करना चाहिए। सबसे बेहतर तरीका यही है कि किसान अपनी मिट्टी की जांच कराएं और उसी के आधार पर खाद की मात्रा तय करें। एक सामान्य स्थिति वाली जमीन पर, प्रति एकड़ धान की फसल को लगभग 48 किलोग्राम नाइट्रोजन, 24 किलोग्राम फास्फोरस और 16 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाइट्रोजन को एक ही बार में खेत में डालने के बजाय उसे तीन हिस्सों में बांटकर देना चाहिए, जिससे पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता रहे और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रहे।

नाइट्रोजन देने का सही समय

किसान सलाहकार अवनीश पटेल ने बताया कि धान के पौधों में क्लोरोफिल बनाने और कल्लों की संख्या बढ़ाने में नाइट्रोजन की भूमिका सबसे बड़ी होती है। 48 किलोग्राम नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए लगभग 100 से 105 किलोग्राम यूरिया पर्याप्त रहता है। इसे तीन चरणों में देना चाहिए:

  • पहली किश्त रोपाई के तुरंत समय दी जानी चाहिए।
  • दूसरी किश्त रोपाई के 25 से 30 दिन बाद, जब पौधों में कल्ले फूटने लगते हैं।
  • तीसरी किश्त 50 से 55 दिन बाद, जब बालियां बनने की अवस्था होती है।

फास्फोरस और पोटाश का महत्व

पौधों की जड़ों के विकास और तने को मजबूती देने के लिए फास्फोरस बहुत अहम है। इसके लिए किसान प्रति एकड़ 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट यानी SSP या फिर 50 किलोग्राम डीएपी (DAP) को अंतिम जुताई के समय खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें। वहीं, धान के दानों की चमक बढ़ाने, उनका वजन बढ़ाने और गुणवत्ता में सुधार करने के लिए 25 से 30 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) प्रति एकड़ के हिसाब से रोपाई के दौरान ही मिट्टी में डालना सबसे अच्छा माना जाता है।

जिंक का प्रयोग और सावधानी

धान की फसल में अक्सर जिंक की कमी देखी जाती है, जिससे खैरा रोग का खतरा रहता है। इस रोग के कारण पत्तियां पीली और कत्थई पड़ने लगती हैं, जिससे उपज पर बुरा असर पड़ता है। इससे बचने के लिए रोपाई के समय प्रति एकड़ 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) का उपयोग करना चाहिए। हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखें कि जिंक सल्फेट को कभी भी फास्फोरस वाली खाद जैसे कि डीएपी या एसएसपी के साथ मिलाकर न डालें। बेहतर नतीजों के लिए इसे केवल यूरिया या सूखी रेत के साथ मिलाकर ही खेतों में प्रयोग करना चाहिए। इन वैज्ञानिक सलाहों को मानकर किसान अपनी खेती को मुनाफे का सौदा बना सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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