निशानेबाज मोना अग्रवाल की प्रेरक कहानी: कभी खेल के उपकरणों के लिए तरसीं, अब लॉस एंजिल्स 2028 में देश के लिए खेलेंगी खेल एक दिन पहले 10
जयपुर की रहने वाली पैरानिशानेबाज मोना अग्रवाल ने चांगवोन में रजत पदक हासिल कर साल 2028 के लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक के लिए अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है।

निशानेबाज मोना अग्रवाल की कहानी देश के लाखों युवाओं के लिए संघर्ष, अटूट जुनून और अद्वितीय सफलता की एक बड़ी मिसाल है। राजस्थान के जयपुर की रहने वाली मोना ने अपनी जिंदगी में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। खेल की दुनिया में अपनी पहचान बनाने से पहले वह वॉलीबॉल खेलती थीं। हालांकि, उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने टोक्यो पैरालिंपिक में भारतीय स्टार निशानेबाज अवनी लेखरा की शानदार सफलता को देखा। अवनी के प्रदर्शन से प्रेरित होकर मोना ने निशानेबाजी को अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया और इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।

शुरुआती संघर्ष और संसाधन की कमी

मोना ने अपनी तैयारियों की शुरुआत जयपुर की एकलव्य शूटिंग अकादमी से की थी। शुरुआती दिनों में उनके पास उच्च स्तर के शूटिंग उपकरण और आवश्यक आधुनिक संसाधन भी उपलब्ध नहीं थे। इन तमाम अभावों के बावजूद उनके हौसले कमजोर नहीं पड़े। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं।

विश्व स्तर पर हासिल की बड़ी सफलताएं

मोना अग्रवाल ने सर्बिया के नोवी सैड में आयोजित डब्ल्यूएसपीएस विश्व कप और पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप-2023 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने खेल प्रेमियों का दिल जीतते हुए पेरिस पैरालिंपिक में व्यक्तिगत श्रेणी में कांस्य पदक हासिल कर तिरंगा लहराया।

लॉस एंजिल्स 2028 का टिकट किया पक्का

अब मोना ने चांगवोन में रजत पदक जीतकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक के लिए भी सफलतापूर्वक क्वालिफाई कर लिया है। मोना अग्रवाल अपनी इस ऐतिहासिक सफलता और खेल यात्रा का पूरा श्रेय अपने कोच योगेश शेखावत को देती हैं, जिन्होंने हर मुश्किल मोड़ पर उनका उचित मार्गदर्शन किया।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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