दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का निधन, साकेत के मैक्स अस्पताल में टूटी सांसों की डोर खेल 54 मिनट पहले 2
भारतीय निशानेबाज और मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। म्यूनिख से लौटते समय तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। मशहूर शूटर और जाने-माने कोच जसपाल राणा का निधन हो गया। महज 49 वर्ष की उम्र में एक मेडिकल इमरजेंसी के दौरान उन्होंने दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके आकस्मिक जाने से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

म्यूनिख से लौटते समय बिगड़ी तबीयत

राणा म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप के बाद भारत लौट रहे थे। रास्ते में ही उन्हें बेचैनी और परेशानी महसूस होने लगी। उनके साथ मौजूद स्टाफ और सहयोगियों ने विमान के उतरते ही तत्काल उन्हें दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

भारत के पिस्टल शूटरों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे राणा को 1 जून को जर्मनी के म्यूनिख से वापसी के दौरान ही तबीयत खराब महसूस होने लगी थी। तभी से मैक्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बाद में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने उनके निधन की पुष्टि की।

हार्ट अटैक की आशंका, सटीक कारण अभी अस्पष्ट

जिस तरह की परेशानी जसपाल राणा को हो रही थी, उससे यह आशंका जताई जा रही है कि उन्हें हार्ट अटैक आया हो। संभव है कि उन्हें विमान में ही हृदय संबंधी समस्या हुई हो। हालांकि उनके निधन की असल वजह को लेकर अभी तक सटीक जानकारी सामने नहीं आई है। अस्पताल की ओर से भी इस बारे में पुष्टि नहीं हुई है कि उन्हें दिल की ही बीमारी थी या किसी अन्य परेशानी के चलते उन्हें अस्पताल लाया गया था।

शानदार करियर और सम्मान

राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। उन्होंने ओलंपिक में दो बार पदक जीतने वाली स्टार निशानेबाज मनु भाकर को कोचिंग दी है। निशानेबाजी में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अपने करियर में उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में करीब 600 पदक हासिल किए।

उत्तरकाशी से निकला सितारा

जसपाल राणा मूल रूप से उत्तराखंड के उत्तरकाशी के रहने वाले थे। भारत में निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने में उनकी बेहद अहम भूमिका रही। फिलहाल वह देश की नई प्रतिभाओं को तराशने का काम कर रहे थे। ओलंपियन मनु भाकर ने उन्हीं की देखरेख में दो-दो पदक अपने नाम किए।

महज 49 साल की उम्र में एक शानदार खिलाड़ी, दिग्गज कोच और हजारों निशानेबाजों के प्रेरणास्रोत जसपाल राणा का इस तरह चले जाना सभी को गमगीन कर गया है। उनके निधन की खबर मिलते ही समूचे खेल जगत में मायूसी छा गई।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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