88 साल का इंतजार खत्म: एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने फ्रेंच ओपन जीतकर रचा इतिहास, बने क्ले कोर्ट के नए सरताज खेल एक घंटा पहले 2
तीन बार ग्रैंड स्लैम फाइनल में हार झेलने के बाद जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने आखिरकार फ्रेंच ओपन खिताब जीतकर अपना पहला मेजर टाइटल हासिल किया और देश का 88 साल का सूखा खत्म कर दिया।

लगभग नौ दशकों के लंबे इंतजार और खिताबी मुकाबलों में तीन बार मिली दिल तोड़ने वाली हार के बाद आखिरकार जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने टेनिस के सबसे बड़े मंच पर अपनी श्रेष्ठता का परचम लहरा दिया है। फ्रेंच ओपन के फाइनल में इटली के फ्लावियो कोबोली के खिलाफ पांच सेटों तक चले मैराथन मुकाबले में 6-1, 4-6, 6-4, 6-7(5), 6-1 से मिली यह जीत महज एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उनके करियर का सबसे यादगार पल साबित हुई।

जर्मन टेनिस के लिए ऐतिहासिक पल

यह जीत जर्मन टेनिस के लिए किसी पर्व से कम नहीं रही। ज्वेरेव साल 1937 में हेनर हेंकेल के बाद फ्रेंच ओपन जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। 88 वर्षों के इस लंबे इंतजार को खत्म करते हुए उन्होंने न सिर्फ अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किया, बल्कि करियर का 25वां टाइटल भी जीत लिया। साल 2026 में यह उनकी 35वीं जीत रही, जो उनकी बेहतरीन फॉर्म और शारीरिक मजबूती की गवाही देती है।

फाइनल तक का कठिन सफर

29 साल की उम्र में अपनी पहली मेजर ट्रॉफी उठाने से पहले ज्वेरेव को तीन बार ग्रैंड स्लैम फाइनल की कड़वाहट झेलनी पड़ी थी। 2020 यूएस ओपन, 2024 फ्रेंच ओपन और फिर 2025 ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। खासकर 2025 के ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में यानिक सिनर के हाथों मिली शिकस्त ने उनके मनोबल की कड़ी परीक्षा ली थी।

इस बार फाइनल में पहला सेट आसानी से जीतने के बाद ज्वेरेव को 24 वर्षीय कोबोली से कड़ी टक्कर मिली। कोबोली ने दूसरा और चौथा सेट जीतकर मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक खींच दिया, लेकिन आखिरी सेट में ज्वेरेव ने दबदबा बनाकर खिताब पर कब्जा जमाया।

किस्मत ने भी दिया साथ

इस साल पेरिस की गर्मी के साथ-साथ किस्मत भी ज्वेरेव के साथ रही। टूर्नामेंट के बड़े दावेदार माने जा रहे यानिक सिनर और नोवाक जोकोविच पहले ही सप्ताह में उलटफेर का शिकार होकर बाहर हो गए। वहीं, गत विजेता कार्लोस अल्कराज चोट के कारण इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाए।

ज्वेरेव के लिए राह कुछ आसान इसलिए भी हुई, क्योंकि सिनर के खिलाफ वह अपने पिछले नौ मैच हार चुके थे और अल्कराज के खिलाफ भी हाल के दिनों में उनका रिकॉर्ड कमजोर रहा था। रोलां गैरो में जोकोविच के खिलाफ पिछले मुकाबलों में भी उन्हें सफलता नहीं मिली थी, लेकिन इस बार नियति ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।

आर्थिक मोर्चे पर बड़ी छलांग

इस खिताबी जीत के साथ ज्वेरेव ने सम्मान के साथ-साथ मोटी इनामी राशि भी हासिल की। चैंपियन बनने पर उन्हें लगभग 3.27 मिलियन डॉलर (करीब 28 लाख यूरो) मिले। इस जीत के बाद उनकी कुल करियर कमाई 65.85 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।

अब वह करियर कमाई के मामले में दुनिया के सातवें स्थान से छलांग लगाकर चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं। इस सूची में उन्होंने यानिक सिनर, कार्लोस अल्कराज और दिग्गज एंडी मरे जैसे खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। खास बात यह है कि अब तक ज्वेरेव करियर कमाई की टॉप-10 सूची में शामिल इकलौते ऐसे खिलाड़ी थे जिनके नाम कोई ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं था, लेकिन अब उनके नाम के आगे 'ग्रैंड स्लैम चैंपियन' का तमगा जुड़ चुका है।

विवादों और संघर्षों की लंबी छाया

मैदान पर मिली इस कामयाबी के पीछे विवादों की एक लंबी परछाई भी रही है। पिछले कुछ वर्षों में ज्वेरेव पर उनकी पूर्व पार्टनर की ओर से शारीरिक और मानसिक शोषण के गंभीर आरोप लगे थे। साल 2023 में एटीपी ने सबूतों के अभाव में उन पर कोई कार्रवाई न करने का फैसला किया था।

इसके बाद एक अन्य पार्टनर के आरोपों के चलते मामला जर्मन अदालत तक पहुंचा, जिसे 2024 में अदालत के बाहर आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। इन तमाम निजी विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच खुद को मानसिक रूप से खेल के लिए तैयार रखना ज्वेरेव के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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