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एक घंटा पहले
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विचारों
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की हताशा
भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह पाकिस्तान भारत के विरुद्ध की गई अपनी सैन्य कार्रवाई के बाद अंधेरे में था और हमलों के सटीक नतीजों को जानने के लिए परेशान हो रहा था। उन्होंने जानकारी दी कि पाकिस्तान ने यह पुष्टि करने के लिए कि उसके हमलों ने भारतीय लक्ष्यों को कोई नुकसान पहुंचाया है या नहीं, कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लेने की कोशिश की थी। इस प्रक्रिया में उन्होंने चीनी सैटेलाइट कंपनियों से भी तस्वीरें प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपनी किसी भी कार्रवाई की सफलता का कोई प्रमाण हासिल नहीं हुआ। जनरल चौहान ने यह बातें नई दिल्ली के विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में 'विमर्श' कार्यक्रम के दौरान साझा कीं।
व्यावसायिक सैटेलाइट इमेजरी की उपलब्धता
पूर्व CDS ने स्पष्ट किया कि आज के समय में कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें किसी एक देश या संस्था की बपौती नहीं हैं। अमेरिका और चीन की तमाम कंपनियां खुले बाजार में ये सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन आधुनिक सेवाओं का उपयोग कोई भी कर सकता है और यह धारणा गलत है कि केवल पाकिस्तानी एजेंसियां ही चीनी कंपनियों से तस्वीरें खरीद सकती हैं। जनरल चौहान ने कहा, चीनी कमर्शियल सैटेलाइट की तस्वीरें किसी भी व्यक्ति या देश के लिए उपलब्ध हैं। कोई भी इनका सौदा कर सकता है। ऐसा सोचना ठीक नहीं है कि केवल पाकिस्तान ही इन्हें खरीदने का अधिकार रखता है। अमेरिका और चीन की कई कंपनियां आज व्यावसायिक स्तर पर उपग्रह से ली गई तस्वीरों की आपूर्ति कर रही हैं, जो कोई भी इस्तेमाल कर सकता है।
तस्वीरों के लिए इंतजार और प्रक्रिया
जनरल चौहान ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि कमर्शियल सैटेलाइट से तस्वीरें मिलना हमेशा उतना आसान नहीं होता जितना समझा जाता है। इसके लिए एक निश्चित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कंपनियों के साथ पहले अनुबंध करना पड़ता है, उसके बाद भुगतान की प्रक्रिया होती है और कई बार तस्वीरें मिलने में समय लगता है। अलग-अलग कंपनियों के सर्विस मॉडल और पैसे के लेनदेन के नियम भिन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि आप केवल पैसे दें और तुरंत आपको वांछित इलाके की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीर मिल जाए। इसमें हमेशा एक वेटिंग टाइम यानी प्रतीक्षा अवधि होती है जो आपके द्वारा किए गए अनुबंध पर निर्भर करती है।
पाकिस्तान का अंधकार और हमलों के परिणाम
पाकिस्तान के रुख पर टिप्पणी करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि हमले के बाद इस्लामाबाद अपने ही किए गए हमलों के परिणामों को लेकर पूरी तरह से अनजान था। उनके मुताबिक, पाकिस्तान के पास इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी कि उनके द्वारा किए गए हमले का जमीन पर क्या असर हुआ है। वे बार-बार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि क्या उन्होंने वास्तव में भारत के किसी सैन्य लक्ष्य को निशाना बनाया है या नहीं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के अधिकारियों की स्थिति ऐसी थी जैसे कि वे अपने ही हमलों के नतीजों को लेकर पूरी तरह से ब्लाइंड यानी अंधेरे में थे। उन्हें कुछ पता ही नहीं था कि उनके हमलों का अंतिम परिणाम क्या निकला है।
चीनी सैटेलाइट से भी नहीं मिला कोई ठोस सबूत
पूर्व CDS ने आगे जानकारी दी कि 10 मई के बाद भी पाकिस्तान 12 मई तक निरंतर तस्वीरें हासिल करने की कोशिश में लगा रहा ताकि उसे कोई ऐसा सबूत मिल सके जो यह साबित कर दे कि उन्होंने भारत को नुकसान पहुंचाया है। जब उन्हें एक स्रोत से सफलता नहीं मिली तो उन्होंने अन्य चीनी सैटेलाइट सेवाओं का भी रुख किया। हालांकि, उनके सारे प्रयास विफल साबित हुए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह रही कि जब उन्हें तस्वीरें नहीं मिलीं तो उन्होंने अन्य चीनी सैटेलाइट सेवाओं को भी आजमाया। लेकिन सच्चाई यह थी कि वे किसी भी लक्ष्य को हिट नहीं कर पाए थे, इसलिए उन्हें कोई भी सबूत हाथ नहीं लगा।
पाकिस्तान के भीतर पनपा गहरा संदेह
जब पाकिस्तान को किसी भी सैटेलाइट इमेज से अपने दावे की पुष्टि नहीं हुई, तो वहां के तंत्र के भीतर ही तरह-तरह के सवाल उठने लगे। जनरल चौहान के अनुसार, वहां के अधिकारी सोचने लगे कि शायद उनसे ही कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई है। उन्हें संदेह होने लगा कि भारत के बढ़ते दबाव के कारण शायद उनके अपने लोगों ने ही उन्हें सही जानकारी नहीं दी। इसके बाद पाकिस्तान में कई तरह की काल्पनिक कहानियों और सिद्धांतों का दौर चल पड़ा।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। यह सैन्य कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए उस घातक आतंकी हमले के बाद शुरू की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने स्पष्ट किया था कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य पाकिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था। इस जवाबी कार्रवाई में दर्जनों आतंकवादी ढेर हुए और पाकिस्तानी सेना के कई महत्वपूर्ण ढांचे पूरी तरह तबाह हो गए। बाद में, अपनी बड़ी क्षति को देखते हुए पाकिस्तान ने खुद कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई, जिसके बाद युद्धविराम की स्थिति बनी।
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