राष्ट्रीय राजनीति
7 घंटे पहले
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विचारों
पहलगाम हमले का जवाब
पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को एक नई चुनौती दी थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि आतंक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने में भारत पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी स्पष्ट कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत के लिए कोई भी सीमा रेखा नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति
पहलगाम में हुए कायराना हमले का करारा जवाब देने के लिए सुरक्षा बलों ने 6 मई और 7 मई की दरम्यानी रात को एक गोपनीय मिशन शुरू किया, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय सेना की ओर से किए गए ये हमले बेहद सटीक थे, जिनका उद्देश्य आतंकी ढांचे को ध्वस्त करना था।
88 घंटे का सैन्य संघर्ष
भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भी पलटवार करने की कोशिश की। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी और जो भी सैन्य कदम उठाए गए, वे सभी ऑपरेशन सिंदूर का ही हिस्सा थे। परमाणु शक्ति संपन्न इन दो पड़ोसी देशों के बीच यह सैन्य तनाव और संघर्ष कुल 88 घंटे तक जारी रहा।
समझौते के साथ विराम
यह सैन्य संघर्ष आखिरकार 10 मई की शाम को थमा। दोनों पक्षों के बीच एक समझौते पर सहमति बनी, जिसके बाद सैन्य गतिविधियां रोक दी गईं। यह पूरा घटनाक्रम भारत की उस नीति का हिस्सा था जिसके तहत आतंकवाद के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त न करने का संकल्प लिया गया था।
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