UGC-NET परीक्षा: केवल 6 फीसदी अभ्यर्थी ही असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के योग्य, संसद में सरकार का खुलासा भारत एक महीने पहले 42
कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि नेट परीक्षा में मात्र 6 प्रतिशत छात्र ही सफल हो पाते हैं, साथ ही जेआरएफ और फेलोशिप को लेकर स्थिति स्पष्ट की।

संसद में सामने आए आंकड़े

हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद के पटल पर यूजीसी-नेट परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे देश के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए पात्रता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या परीक्षा में बैठने वालों का मात्र 6 प्रतिशत है। इसके अलावा, हर साल कुल 11,750 मेधावी अभ्यर्थियों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ का लाभ दिया जाता है। इस जानकारी को केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान किया।

शशि थरूर के तीखे सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार से नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों का विस्तृत डेटा मांगा था। इसके साथ ही उन्होंने जेआरएफ की संख्या को बढ़ाने या पात्रता से जुड़े मौजूदा नियमों में किसी प्रकार के बदलाव की संभावनाओं पर सरकार का रुख जानना चाहा था। थरूर ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या शिक्षा मंत्रालय इस बात से अवगत है कि यूजीसी द्वारा दी जाने वाली नॉन-नेट फेलोशिप की राशि वर्ष 2006 के बाद से अब तक 8,000 रुपये प्रति माह पर ही अटकी हुई है।

सरकार का आधिकारिक रुख

अपने जवाब में मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के आधार पर ही जेआरएफ का आवंटन करता है। उन्होंने दोहराया कि नेट परीक्षा में शामिल होने वाले कुल अभ्यर्थियों में से केवल 6 प्रतिशत ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हेतु अर्हता प्राप्त करते हैं। इन्हीं सफल और पात्र अभ्यर्थियों के दायरे से यूजीसी प्रतिवर्ष 11,750 लोगों को जेआरएफ प्रदान करती है।

मंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि इसके अलावा कई अन्य सरकारी मंत्रालय और विभिन्न संस्थान भी पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को अलग-अलग प्रकार की फेलोशिप उपलब्ध कराते हैं। साथ ही, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग छात्रों और एकल बालिका श्रेणी के लिए विशेष फेलोशिप का प्रावधान भी रखा गया है।

शोधार्थियों के लिए अन्य विकल्प

सरकार के अनुसार, पीएचडी शोधार्थी अलग-अलग वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा विश्वविद्यालयों को स्वीकृत शोध परियोजनाओं के माध्यम से भी आर्थिक सहायता पा सकते हैं। हालांकि, कई छात्र बिना किसी वित्तीय मदद के भी पीएचडी में प्रवेश लेते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को आंशिक आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से ही यूजीसी नॉन-नेट फेलोशिप योजना चलाता है।

थरूर ने असंतोष जताते हुए उठाए सवाल

सरकार के जवाब से कांग्रेस सांसद शशि थरूर संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने उनके प्रश्नों का सीधा उत्तर देने के बजाय केवल सामान्य जानकारी दी है। थरूर का कहना है कि मंत्रालय ने नेट उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों और जेआरएफ प्राप्तकर्ताओं का वर्षवार विवरण नहीं दिया।

थरूर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार ने जेआरएफ की संख्या बढ़ाने, पात्रता के नियमों को बदलने या पात्र उम्मीदवारों और उपलब्ध फेलोशिप के बीच बढ़ते अंतर को पाटने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बताई। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2006 से स्थिर 8,000 रुपये की नॉन-नेट फेलोशिप राशि को न बढ़ाए जाने पर सरकार की चुप्पी से भी उन्होंने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने याद दिलाया कि यह मुद्दा उन्होंने वर्ष 2023 में भी लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया था, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट समयसीमा या आश्वासन नहीं मिला है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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