छत्तीसगढ़ के इस गांव में शराब दुकान बंद करने के बजाय खोलने की मांग, ग्राम सभा में अनोखा प्रस्ताव हुआ पारित छत्तीसगढ़ 2 महीने पहले 71
बलौदाबाजार के नरधा गांव में अवैध महुआ शराब के बढ़ते प्रकोप से परेशान ग्रामीणों ने ग्राम सभा की बैठक में सरकारी कंपोजिट शराब दुकान खोलने का अनोखा प्रस्ताव पारित किया है।

आमतौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में शराब बंदी लागू करने या शराब की दुकानों को बंद कराने के लिए विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन देखने को मिलते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और बिल्कुल उलट मामला सामने आया है। यहां के एक गांव में ग्रामीणों ने शराब की दुकान बंद कराने के बजाय, खुद सरकार से अपने यहां सरकारी शराब दुकान खोलने की गुहार लगाई है। इस मांग को लेकर बाकायदा ग्राम सभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है।

महुआ शराब के अवैध कारोबार से परेशान हैं ग्रामीण

यह पूरा मामला बलौदाबाजार जिले की टुण्ड्रा तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नरधा का है। ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव में हो रहे अवैध महुआ शराब के निर्माण और उसकी धड़ल्ले से हो रही बिक्री से बेहद त्रस्त हो चुके हैं। गांव में लंबे समय से बड़े पैमाने पर कच्ची और जहरीली महुआ शराब बनाई जा रही है, जिसने स्थानीय लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस अवैध शराब के सेवन से कई लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ चुका है और गांव का सामाजिक माहौल भी पूरी तरह खराब हो रहा है।

ग्राम सभा की बैठक में लिया गया अनोखा फैसला

इस गंभीर समस्या से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीणों ने एक अनोखा रास्ता चुना है। बीते 24 जून को ग्राम पंचायत नरधा में एक विशेष ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में शासन से मांग की गई है कि गांव में एक सरकारी कंपोजिट शराब दुकान खोली जाए। ग्रामीणों का मानना है कि सरकारी दुकान खुलने से अवैध महुआ शराब के धंधे पर लगाम लगेगी और लोगों को जहरीली शराब के बजाय नियंत्रित शराब मिल सकेगी, जिससे उनकी सेहत को होने वाला जानलेवा खतरा कम होगा।

जहां एक तरफ छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में महिलाएं और सामाजिक संगठन शराब दुकानों को बंद करवाने के लिए प्रदर्शन करते रहते हैं, वहीं नरधा गांव का यह फैसला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों की इस अजीबोगरीब मांग और ग्राम सभा के इस प्रस्ताव पर अब आबकारी विभाग और प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन इस फैसले ने अवैध शराब की समस्या की जमीनी हकीकत को जरूर उजागर कर दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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