ओडिशा में स्कूली किताबों की बड़ी गलतियों पर बवाल, पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक खुद मैदान में उतरे, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भारत 55 मिनट पहले 2
ओडिशा के सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियां सामने आने के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की है।

ओडिशा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में गंभीर और हैरान करने वाली गलतियों का मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील विषय को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब खुद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक इस विवाद में सीधे तौर पर उतर आए हैं। उन्होंने स्कूली बच्चों की शिक्षा में हुई इस बड़ी लापरवाही को लेकर राज्य के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। नवीन पटनायक का स्पष्ट मानना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय में बार-बार हो रही लापरवाही की पूरी जवाबदेही शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।

नवीन पटनायक का कड़ा रुख और नैतिकता का हवाला

नवीन पटनायक ने सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि हाल के दिनों में ओडिशा के सरकारी विद्यालयों में वितरित की गई कई पुस्तकों में बहुत बड़ी तथ्यात्मक और भाषाई त्रुटियां उजागर हुई हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पाठ्यपुस्तकों में इस प्रकार की कमियां सीधे तौर पर बच्चों के मानसिक विकास और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। बचपन में सीखी गई गलत बातें छात्रों के मन में हमेशा के लिए भ्रम पैदा कर सकती हैं, जिसे बाद में सुधारना बेहद कठिन होता है।

नवीन पटनायक ने जवाबदेही की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का उदाहरण सामने रखना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजू जनता दल पिछले दो से तीन सप्ताह से लगातार इस विषय को पूरी मुखरता से उठा रहा है और सरकार से इस दिशा में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

पाठ्यपुस्तकों में किस तरह की गलतियां आईं सामने?

इस पूरे राजनीतिक विवाद की मुख्य वजह सरकारी किताबों में बड़े पैमाने पर पाई गई त्रुटियां हैं। हाल ही में सामने आए मामलों के अनुसार, पुस्तकों में नीचे लिखी गंभीर कमियां देखी गई हैं:

  • तथ्यात्मक और ऐतिहासिक भूलें: कुछ महत्वपूर्ण अध्यायों में ऐतिहासिक तथ्यों, तारीखों और महत्वपूर्ण सूचनाओं को पूरी तरह से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
  • व्याकरण और वर्तनी की त्रुटियां: किताबों में वर्तनी और भाषा के स्तर पर बेहद निराशाजनक गलतियां मिली हैं, जिससे शब्दों का मूल अर्थ ही बदल गया है।
  • छपाई की अशुद्धियां: कई स्थानों पर वाक्यों और शब्दों की छपाई का स्तर बहुत खराब है, जिसके कारण शिक्षकों को पढ़ाने और छात्रों को पढ़ने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

इन गलतियों के सामने आने के बाद से ही न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि शिक्षक संघों और अभिभावकों के बीच भी गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। उनका मानना है कि बच्चों को दी जाने वाली जानकारी पूरी तरह से सटीक और प्रामाणिक होनी चाहिए।

बीजू जनता दल के सरकार पर तीखे आरोप

इस मुद्दे को लेकर बीजू जनता दल लगातार वर्तमान सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। पार्टी का सीधा आरोप है कि शिक्षा विभाग ने पुस्तकों को छापने और वितरित करने से पहले उनकी गुणवत्ता की सही तरीके से समीक्षा नहीं की। विभाग की इस घोर लापरवाही के कारण ही इतनी अशुद्ध पुस्तकें निर्दोष छात्रों के हाथों तक पहुंच गईं। विपक्षी दल का कहना है कि सिर्फ आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार उच्च अधिकारियों पर भी गाज गिरनी चाहिए।

ओडिशा में शिक्षा के स्तर पर छिड़ी नई बहस

सरकारी पाठ्यपुस्तकों में पाई गई इन बड़ी खामियों ने पूरे ओडिशा में शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में आ चुका है। शिक्षाविदों का भी मानना है कि ऐसी गलतियां राज्य की साख को प्रभावित करती हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष के इस भारी विरोध के बाद राज्य सरकार क्या कदम उठाती है और त्रुटिपूर्ण किताबों को वापस लेने या उनमें सुधार करने के लिए धरातल पर क्या त्वरित कार्रवाई की जाती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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