भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता: अजीत डोवल और वांग यी ने शांति बहाल करने पर की चर्चा विश्व एक घंटा पहले 5
भारत और चीन ने सीमा विवाद सुलझाने और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में विशेष प्रतिनिधियों के 25वें दौर की बातचीत की। एनएसए अजीत डोवल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा पर स्थिरता सुनिश्चित करने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

सीमा वार्ता का नया दौर

चीन की राजधानी बीजिंग में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने किया, जबकि चीनी पक्ष की ओर से विदेश मंत्री वांग यी वार्ता में शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश वर्ष 2020 में गलवान घाटी की झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में उत्पन्न हुए लंबे सैन्य गतिरोध के दुष्प्रभावों को पीछे छोड़कर संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में सक्रिय हैं। आने वाले 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले इस उच्च-स्तरीय संवाद को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

नेताओं के मार्गदर्शन पर चर्चा

अपनी शुरुआती बातचीत के दौरान अजीत डोवल ने इस बात पर संतोष जताया कि पिछले एक वर्ष में भारत और चीन के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सुधार का मुख्य आधार सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों देशों द्वारा बनाए रखा गया शांतिपूर्ण वातावरण है। डोवल ने कहा कि यह बैठक BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि दोनों पक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा हाल के दिनों में दिए गए स्पष्ट और सकारात्मक मार्गदर्शन के अनुरूप ही काम कर रहे हैं। डोवल ने याद दिलाया कि 2024 में कजान में BRICS शिखर सम्मेलन और उससे पहले तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन के दौरान हुई नेताओं की मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा प्रदान की है।

सीमा पर शांति की प्राथमिकता

वार्ता के दौरान अजीत डोवल ने सीमा पर शांति और स्थिरता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में उपजे तनाव के बाद संबंधों में जो सुधार देखने को मिल रहा है, वह दोनों पक्षों के ठोस प्रयासों का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि बैठक में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई है कि सीमावर्ती इलाकों में शांति के प्रयासों को और अधिक प्रभावी ढंग से कैसे पुख्ता किया जाए। डोवल के अनुसार, शांति और स्थिरता बनाए रखना ही भारत-चीन संबंधों में सामान्य स्थिति वापस लाने की पहली शर्त है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापारिक बहाली

रिश्तों में बढ़ते विश्वास के संकेतों पर बात करते हुए अजीत डोवल ने जन-स्तर के संपर्क की सराहना की। उन्होंने कहा कि नाथू ला के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा का सफलतापूर्वक आयोजन होना और तीनों प्रमुख दर्रों के जरिए पारंपरिक सीमा व्यापार का फिर से शुरू होना सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों के लिए काफी लाभदायक रहा है। वर्षों की रुकावटों के बाद इन गतिविधियों का पुन: संचालन यह दर्शाता है कि दोनों देश अब आपसी जुड़ाव को बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठा रहे हैं।

चीन का रुख और भविष्य की रणनीति

चीनी पक्ष के प्रतिनिधि वांग यी ने इस दौरान कहा कि भारत और चीन के रिश्ते अब केवल द्विपक्षीय दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका महत्व वैश्विक स्तर पर है। वांग यी ने जोर दिया कि दोनों देशों के लिए जरूरी है कि वे आपसी भरोसा बढ़ाएं और तमाम रुकावटों को पार करें। उन्होंने भारत को एक अच्छा पड़ोसी और दोस्त बताते हुए कहा कि चीन ऐसे पार्टनर के रूप में काम करना चाहता है जो एक-दूसरे की प्रगति और सफलता में सहयोगी बने।

वांग यी ने उम्मीद जताई कि साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर निरंतर विचार-विमर्श से वे बॉर्डर विवाद को सही ढंग से प्रबंधित कर सकेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देशों का पालन करते हुए दोनों देशों के डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनल्स लगातार संवाद में हैं। वांग ने अजीत डोवल के साथ हुई इस बातचीत को अत्यंत गहरा और पारदर्शी करार दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधि इस संवाद के माध्यम से किसी नई आम सहमति तक पहुंचने में सफल रहेंगे, जिससे न केवल सीमा पर शांति बनी रहेगी, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी एक नई ऊर्जा और गति मिलेगी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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