बिना मिसाइल और बारूद के हवा में ड्रोन को डीप फ्राई कर देंगे अमेरिका के 4 'दिव्यास्त्र', सेंसर से लेकर मोटर तक सब होगा शटडाउन अमेरिका 3 घंटे पहले 3
अमेरिका ने ड्रोन हमलों से निपटने के लिए मिसाइल और बारूद को छोड़कर हाई-टेक डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों को युद्ध के मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है। ये चार अत्याधुनिक हथियार दुश्मनों के ड्रोन को पलक झपकते ही हवा में भून डालने में सक्षम हैं।

युद्ध के मैदान में बदल रही है चुनौती

आधुनिक युद्ध का स्वरूप अब पूरी तरह से बदल चुका है। आज के दौर में भारी-भरकम मिसाइलों, तोपों और बड़े सैन्य बेड़ों की जगह सस्ते और बेहद घातक ड्रोन्स ने ले ली है। दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं के लिए ये छोटे ड्रोन अब एक बड़ी मुसीबत बन गए हैं। अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्र भी इन ड्रोन्स के झुंड के सामने खुद को असहाय महसूस करने लगे थे। पारंपरिक युद्धनीति में इन छोटे ड्रोन्स को गिराने के लिए पैट्रियट जैसी महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि यह सेना के खजाने को भी खाली करने वाला साबित हो रहा था। इसी समस्या का स्थायी समाधान ढूंढते हुए पेंटागन ने अब युद्ध का एक नया खाका तैयार किया है, जिसमें मिसाइल युग को पीछे छोड़ने की तैयारी है।

पेंटागन का नया रक्षा ब्लूप्रिंट

अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब अपने महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों की सुरक्षा के लिए मिसाइलों के बजाय 'डायरेक्टेड एनर्जी' हथियारों पर दांव लगाया है। 'जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401' के नेतृत्व में इन हथियारों का परीक्षण युद्ध के वास्तविक वातावरण में किया जा रहा है। ये हथियार इतने शक्तिशाली हैं कि इनके जरिए हमला करने पर दुश्मन के ड्रोन को किसी मिसाइल की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि ये बिना आवाज और बिना किसी धमाके के ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर और ईंधन टैंक को पूरी तरह से ठप कर देते हैं।

चुने गए चार जादुई हथियार

अमेरिका ने अपनी सुरक्षा के लिए चार ऐसे घातक सिस्टम का चयन किया है जिन्हें दुनिया की दिग्गज रक्षा कंपनियों ने विकसित किया है। ये चारों हथियार दो अलग-अलग तकनीकों पर आधारित हैं और इनकी कार्यक्षमता अद्वितीय है:

  • AeroVironment का पलेटीज्ड हाई एनर्जी लेजर: यह एक अत्यंत शक्तिशाली और ले जाने योग्य लेजर सिस्टम है, जिसे आसानी से ट्रकों पर लगाकर या स्थायी सैन्य चौकियों पर तैनात किया जा सकता है।
  • Epirus का लियोनिडास हाई पावर्ड माइक्रोवेव सिस्टम: यह हथियार आसमान में अदृश्य माइक्रोवेव तरंगों की एक ऐसी सुरक्षा दीवार बनाता है, जो एक साथ दर्जनों ड्रोन्स के सर्किट को जलाकर राख कर सकती है।
  • Kord का फायरफ्लाई हाई एनर्जी लेजर: इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह दुश्मन के ड्रोन पर बेहद तेज और अचूक लेजर बीम दागकर उसे पिघलाने में सक्षम है।
  • Boeing का कॉम्पैक्ट लेजर वोपन सिस्टम: एयरोस्पेस की दिग्गज कंपनी बोइंग द्वारा बनाया गया यह लेजर हथियार वजन में हल्का और आकार में छोटा है, जिसे किसी भी कठिन मोर्चे पर तुरंत तैनात किया जा सकता है।

लेजर हथियार कैसे करते हैं काम?

ये हाई एनर्जी लेजर हथियार बारूद के बजाय अत्यधिक केंद्रित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी बीम का उपयोग करते हैं। ये बीम प्रकाश की गति यानी लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दुश्मन की ओर बढ़ती हैं। जब कोई भी संदिग्ध ड्रोन सुरक्षा दायरे में आता है, तो सिस्टम का ऑटोमेटेड रडार उसे ट्रैक करता है और बीम को ड्रोन के संवेदनशील अंगों जैसे मोटर, ईंधन टैंक या ऑप्टिकल सेंसर पर केंद्रित कर देता है। पलक झपकते ही पैदा हुई तीव्र गर्मी ड्रोन के धातु और प्लास्टिक ढांचे को पिघला देती है, जिससे वह हवा में ही जलकर 'डीप फ्राई' हो जाता है और जमीन पर गिर पड़ता है। अमेरिकी थल सेना के अधिकारियों का कहना है कि इन हथियारों का सबसे बड़ा लाभ इनका 'कॉस्ट पर शॉट' है, जो लगभग न के बराबर है। जब तक बिजली की आपूर्ति उपलब्ध है, ये हथियार लगातार फायर कर सकते हैं और इनमें मिसाइल की तरह मैगजीन खत्म होने का कोई डर नहीं है।

माइक्रोवेव हथियार: ड्रोन्स के झुंड का काल

यदि लेजर को एक स्नाइपर राइफल कहा जाए, तो हाई पावर्ड माइक्रोवेव (HPM) हथियार एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक जाल की तरह काम करते हैं। अमेरिकी नेवी के रिसर्च ऑफिस के अनुसार, एचपीएम सिस्टम बेहद शक्तिशाली माइक्रोवेव रेडिएशन की एक चौड़ी बीम छोड़ता है। जब ये तरंगें हवा में उड़ रहे ड्रोन्स के झुंड से टकराती हैं, तो बिना किसी बाहरी धमाके के ये सीधे ड्रोन के अंदरूनी मदरबोर्ड, माइक्रोचिप और जीपीएस को ओवरहीट कर जला देती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि ड्रोन की मोटर और सेंसर एक साथ बंद हो जाते हैं और पूरा झुंड बेजान होकर जमीन पर आ गिरता है।

क्या मिसाइलों का दौर खत्म हो रहा है?

इन अत्याधुनिक हथियारों को पायलट प्रोग्राम में शामिल करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में युद्ध में बारूद का प्रभुत्व कम होने वाला है। जिन ड्रोन्स ने दुनिया के महंगे टैंकों और डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ाई थीं, अब ये नई डायरेक्टेड एनर्जी टेक्नोलॉजी उन्हीं का सबसे बड़ा काल साबित होगी। भविष्य के युद्ध में ये लेजर और माइक्रोवेव हथियार एंटी-एयरक्राफ्ट तोपों के साथ मिलकर एक ऐसी 'मल्टी-लेयर्ड शील्ड' बनाएंगे, जिसे भेदना किसी भी दुश्मन के लिए असंभव होगा। बिना मिसाइल और बिना शोर के, प्रकाश की गति से तबाही मचाने वाले ये 'दिव्यास्त्र' आधुनिक सैन्य रणनीति की एक नई और निर्णायक इबारत लिख रहे हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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