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2 घंटे पहले
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जांच में नहीं मिले अतनु चक्रवर्ती के दावों के प्रमाण
प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज बैंक एचडीएफसी बैंक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसके पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती द्वारा उठाए गए गंभीर नैतिक सवालों की विस्तृत कानूनी समीक्षा पूरी हो गई है। दो स्वतंत्र बाहरी कानूनी फर्मों द्वारा तीन महीने तक की गई इस गहन जांच में ऐसा कोई भी तथ्य या सबूत सामने नहीं आया है, जो उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की गई चिंताओं की पुष्टि कर सके। बैंक ने स्पष्ट किया कि 24 मार्च को सार्वजनिक की गई इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या अतनु चक्रवर्ती ने अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी स्तर पर औपचारिक रूप से कोई असहमति दर्ज कराई थी और क्या उन मुद्दों के समाधान के लिए कोई प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इस साल मार्च में दिया था चौंकाने वाला इस्तीफा
अतनु चक्रवर्ती ने 17 मार्च, 2026 को एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर बाजार में हलचल पैदा कर दी थी। देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक के इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया हो। अपने इस्तीफे के पत्र में चक्रवर्ती ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि पिछले दो वर्षों के दौरान बैंक के भीतर उन्होंने जो घटनाएं देखीं और जो कार्यप्रणालियां अपनाई गईं, वे उनके निजी मूल्यों और नैतिक मानकों से मेल नहीं खाती थीं। इसी नैतिक असहमति को उन्होंने अपने इस्तीफे का प्राथमिक कारण बताया था।
शेयर बाजार को दी गई समीक्षा की जानकारी
शुक्रवार को एचडीएफसी बैंक ने शेयर बाजार को दी गई एक सूचना में पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। बैंक ने बताया कि यह व्यापक कानूनी समीक्षा विल्सन सोनसिनी गुडरिच एंड रोसाटी, पीसी तथा वाडिया गांधी एंड कंपनी द्वारा संचालित की गई थी। इस जांच प्रक्रिया के तहत पिछले दो वर्षों के बोर्ड मीटिंग्स, कमेटी बैठकों के एजेंडा, हजारों महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को बारीकी से खंगाला गया। इसके अलावा, जांच करने वाली कंपनियों ने बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर, सीईओ, सीनियर एग्जीक्यूटिव्स और स्वतंत्र निदेशकों से भी पूछताछ की। जांच के दौरान इन कंपनियों ने अतनु चक्रवर्ती से भी समीक्षा में सहयोग करने और इंटरव्यू देने का कई बार अनुरोध किया, लेकिन उनके द्वारा कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण उनका पक्ष दर्ज नहीं किया जा सका।
क्या निकला जांच का निष्कर्ष
जांच के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए बैंक ने बताया कि समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि अतनु चक्रवर्ती के बयानों और उनमें निहित संकेतों को किसी भी रिकॉर्ड या गवाह से बल नहीं मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन बोर्ड बैठकों में अतनु चक्रवर्ती शामिल हुए थे, उनका कार्यवाही विवरण अत्यंत व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया गया था और उसे अनुमोदित भी किया गया था। ऐसी बैठकों में किसी भी प्रकार की असहमति या चिंता व्यक्त करने के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद थे। जांच में यह निष्कर्ष निकला है कि बोर्ड के रिकॉर्ड, मीटिंग के दस्तावेज या आपसी चर्चाओं में ऐसा कोई भी तथ्य सामने नहीं आया है, जो उनके द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करता हो।
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