बिना निवेश के मुंबई में खड़ा किया फर्जी साम्राज्य, अब 'सेमीकॉइन' घोटाले का मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त में क्राइम 3 घंटे पहले 2
अहमदाबाद पुलिस ने 'ऑपरेशन हॉकआई' के तहत करीब 10 महीने से फरार चल रहे शातिर ठग नीलेश पटेल को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी को अंजाम दिया था और अब वह सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा घोटाला करने की फिराक में था।

ऑपरेशन हॉकआई में मिली सफलता

गुजरात पुलिस के लिए पिछले 10 महीनों से चुनौती बने एक बड़े धोखेबाज को आखिर कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। अहमदाबाद पुलिस ने अपने विशेष अभियान ऑपरेशन हॉकआई के अंतर्गत लंबे समय से फरार चल रहे नीलेश पटेल नामक अपराधी को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से धर दबोचा है। यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, क्योंकि नीलेश पुलिस को चकमा देने में माहिर था और लगातार अपनी पहचान तथा ठिकाने बदलकर जांच एजेंसियों को गुमराह कर रहा था।

कैसे शुरू हुआ पुलिस का शिकंजा

अहमदाबाद के जोन-7 में शुरू किए गए ऑपरेशन हॉकआई का मुख्य उद्देश्य इलाके के 8 थानों में वांछित और फरार अपराधियों को ढूंढ निकालना था। पुलिस द्वारा तैयार की गई भगोड़ों की सूची में कुल 32 नाम शामिल थे, जिनमें नीलेश पटेल का नाम भी प्रमुख था। करीब 10 महीने की कड़ी मशक्कत और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि नीलेश मध्य प्रदेश के बैतूल में छिपकर रह रहा है। सूचना मिलते ही गुजरात पुलिस की एक टीम तुरंत रवाना हुई और स्थानीय पुलिस की मदद से 18 अगस्त को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे अहमदाबाद लाया गया, जहां पूछताछ के दौरान उसकी ठगी की हैरान कर देने वाली परतें खुलने लगीं।

फर्जी दस्तावेजों और कंपनियों का खेल

जांच में पता चला कि नीलेश पटेल ने धोखाधड़ी का एक जटिल जाल बुन रखा था। वह केवल फर्जी कंपनियां खड़ा करने का ही माहिर नहीं था, बल्कि बैंक लोन लेने के लिए भी वह अनोखे हथकंडे अपनाता था। वह मशीनरी खरीदने के नाम पर बैंकों में झूठे कोटेशन जमा करता था। लोन हासिल करने के लिए दिखाई जाने वाली संपत्तियों के मामले में भी वह बड़े पैमाने पर हेराफेरी करता था। कई बार तो संपत्ति के असली मालिकों को पता ही नहीं होता था कि उनकी जमीन या प्रॉपर्टी पर लोन लिया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों में वह पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज तैयार करके बैंकों को चूना लगाता था। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ केवल वासना थाने में ही 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है, जबकि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में दर्ज तीन अन्य मामलों में उस पर कुल 14 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है।

सेमीकंडक्टर के नाम पर अगला बड़ा कदम

पूछताछ में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि नीलेश मुंबई में टॉर्शन नाम से लगभग 20 कंपनियां संचालित कर रहा था। वह इन कंपनियों के बीच फंड को घुमाकर वित्तीय अनियमितताएं करता था और इसके जरिए बड़े बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन ऐंठने की योजना बना रहा था। इतना ही नहीं, आरोपी की अगली नजर भारत के तेजी से उभरते सेमीकंडक्टर सेक्टर पर थी। उसने टॉर्शन लिबरल साइंटिफिक नाम से एक फर्जी सेमीकंडक्टर कंपनी बनाई थी और वह सेमीकॉइन नामक अपना एक नया कॉइन लॉन्च करने की तैयारी में था। वह इस डिजिटल करेंसी के जरिए निवेशकों से मोटी रकम बटोरने का षड्यंत्र रच रहा था, लेकिन अपने मंसूबों को हकीकत में बदलने से पहले ही वह कानून के फंदे में फंस गया। फिलहाल पुलिस इस मामले में उससे विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि उसके द्वारा की गई अन्य ठगी का पूरा हिसाब निकाला जा सके।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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