राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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पंजाब के बहुचर्चित अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। जालंधर के एक हॉस्टल से AK-56 राइफल, जिंदा कारतूस और विस्फोटक बरामद किए जाने के इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है।
हॉस्टल को बनाया था छिपने का ठिकाना
सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए आतंकियों ने हॉस्टल को अपना अड्डा बना रखा था। अपनी खतरनाक साजिशों को अंजाम देने के मकसद से इन लोगों ने वहीं एके-56 जैसे घातक हथियार जमा कर रखे थे। हालांकि, आतंकी अपने नापाक इरादों में कामयाब हो पाते, उससे पहले ही पंजाब पुलिस को इसकी भनक लग गई।
तलाशी में बरामद हुआ हथियारों का जखीरा
पंजाब पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान मौके से AK-56 राइफल, मैगजीन, जिंदा कारतूस और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई।
करीब 8 साल बाद आया फैसला
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, करीब 8 साल के इंतजार के बाद आखिरकार इन आतंकियों को सजा मिल गई है। मोहाली की विशेष अदालत ने मामले के तीन आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाया।
किसे कितनी सजा
अदालत ने जाहिद गुलजार को 10 साल, यासिर रफीक भट को 7 साल और मोहम्मद इदरीस शाह को दोषी मानते हुए 5 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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