हौसला टूट रहा है मुश्किल वक्त में? सुंदरकांड की ये 4 चौपाइयां बनेंगी संकट में सहारा, देती हैं आगे बढ़ने की प्रेरणा धर्म एक घंटा पहले 3
जीवन के कठिन दौर में आत्मविश्वास डगमगाने पर सुंदरकांड की चौपाइयां मन को शांति और हिम्मत देती हैं। जानिए ऐसी 4 चौपाइयां, जो संकट के समय सहारा और प्रेरणा का काम करती हैं।

जीवन में सुख-दुख और सफलता-असफलता का सिलसिला चलता रहता है। कभी कामयाबी कदम चूमती है तो कभी एक के बाद एक नाकामी इंसान का आत्मविश्वास तोड़ देती है। ऐसे कठिन क्षणों में आध्यात्मिक ग्रंथ जीवन को नई राह दिखाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित सुंदरकांड को साहस, धैर्य और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इसमें वर्णित कई चौपाइयां ऐसी हैं, जो विषम परिस्थितियों में मन को शांति प्रदान करती हैं। यही वजह है कि मुश्किल समय में इनका पाठ या स्मरण लाभकारी माना गया है। यहां पढ़ें ऐसी 4 चौपाइयां, जो संकट में सहारा बनती हैं और हौसला बढ़ाती हैं।

जब कोई काम असंभव लगने लगे

कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहि होइ तात तुम पाहीं।।

यह चौपाई उस प्रसंग की है, जब जामवंत जी हनुमान जी को उनकी असीम शक्ति का स्मरण कराते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को लेकर दुविधा में हो, तब यह चौपाई खुद पर भरोसा कायम रखने की प्रेरणा देती है। इसका भाव है कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ कोई भी काम असंभव नहीं रहता।

निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश

राम काज कीन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम।।

हनुमान जी के इस भाव में कर्म और समर्पण की सीख छिपी है। इसका अर्थ है कि जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाए, तब तक प्रयास जारी रखना चाहिए। यह चौपाई कठिनाइयों के बीच भी हार न मानने और लगातार आगे बढ़ते रहने का हौसला देती है।

जब परिणाम की चिंता सताए

जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू।
सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।।

इस चौपाई का भाव है कि जिस कार्य के प्रति सच्ची निष्ठा, मेहनत और समर्पण होता है, उसमें सफलता की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है। यह व्यक्ति को परिणाम की फिक्र छोड़कर अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की सीख देती है।

मुश्किल में मन को मिलेगी शांति

दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी।।

जब इंसान खुद को असहाय महसूस करता है और कोई राह नजर नहीं आती, तब यह चौपाई ईश्वर के प्रति विश्वास और समर्पण का भाव जगाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका स्मरण मन को शांति देता है और कठिन घड़ी में सकारात्मक नजरिया बनाए रखने में सहायक होता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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