चौरचन पूजा 2026: जानें इस पावन पर्व का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, विधि, मंत्र, आरती और पारंपरिक गीत धर्म एक घंटा पहले 6
मिथिलांचल के प्रसिद्ध लोक पर्व चौरचन की तिथि, पूजा का सही समय, आवश्यक सामग्री और संपूर्ण विधि की विस्तृत जानकारी यहाँ पढ़ें।

भारत के सांस्कृतिक मानचित्र पर मिथिलांचल अपनी अनूठी परंपराओं और लोक आस्था के पर्वों के लिए एक विशेष स्थान रखता है। इन्हीं में से एक बेहद पावन और प्रसिद्ध पर्व है चौरचन। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को जहाँ पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, वहीं मिथिला के घरों में इसे चौरचन के रूप में मनाने की समृद्ध परंपरा है। इस पावन अवसर को मिथिलांचल में चौथ चांद, चौथ चंद्र और चारचन्ना पावनि जैसे विभिन्न नामों से भी पुकारा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी सौभाग्यवती महिला इस कठिन व्रत का पालन करती है, उसके घर-परिवार में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि का वास रहता है। इसके साथ ही ऐसी मान्यता भी है कि इस व्रत को निष्ठापूर्वक करने से मनुष्य को मिथ्या दोष और झूठे कलंक से मुक्ति मिलती है और उसकी रक्षा होती है। इस विशेष दिन पर घर के आंगन और छत को पूरी तरह से साफ-सुथरा करके वहां बेहद खूबसूरत अरिपन (चावल के घोल से बनी अल्पना) बनाई जाती है। इस व्रत के दौरान श्रद्धालु मुख्य रूप से भगवान गणेश और चंद्र देव की उपासना करते हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में चौरचन पूजा के शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री, पूजा विधि, मंत्र, आरती और इससे जुड़े लोक गीतों के बारे में विस्तार से।

चौरचन पूजा का शुभ मुहूर्त 2026

साल 2026 में चौरचन पूजा के लिए बेहद शुभ समय उपलब्ध रहेगा। इस वर्ष चौरचन पूजा का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त 14 सितंबर 2026 की शाम को 5:54 बजे से शुरू होकर रात 07:36 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि के भीतर अपनी पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए।

चौरचन पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

इस पावन पूजा को संपन्न करने के लिए कई पारंपरिक सामग्रियों की आवश्यकता होती है। पूजा की तैयारी करते समय नीचे दी गई सामग्रियों की सूची को अवश्य नोट कर लें:

  • दूध, गाढ़ा दही और तिल
  • सुपारी और लाल या सफेद चंदन
  • ताजा और शुद्ध जल
  • पूजा के लिए शंख
  • स्वादिष्ट खीर और ऋतु के अनुसार मौसमी फल
  • पूजा के लिए सिंदूर
  • केले के पत्ते और आम के हरे पत्ते
  • तांबे या मिट्टी का कलश
  • बांस से बना हुआ विशेष सूप
  • मिट्टी का दीपक और डाली
  • पूजा के लिए नया वस्त्र
  • अरवा चावल का शुद्ध आटा (पीठार)
  • अष्टदल कमल की आकृति (अल्पना)
  • हरी दूर्वा और बेलपत्र
  • सफेद फूलों की माला
  • अक्षत (बिना टूटे हुए कच्चे चावल)

चौरचन पूजा की संपूर्ण और प्रामाणिक विधि

चौरचन पूजा को बेहद नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है। इसकी मुख्य पूजन विधि इस प्रकार है:

  • इस विशेष पूजा का आयोजन हमेशा शाम के समय चंद्रोदय होने के बाद ही किया जाता है।
  • घर की व्रती महिलाएं अपने घर के आंगन या साफ-सुथरी छत पर इस पूजा का प्रबंध करती हैं।
  • पूजा शुरू करने से पहले आंगन या छत के एक हिस्से को अच्छी तरह साफ किया जाता है और वहां अरवा चावल के आटे के घोल से सुंदर अरिपन बनाई जाती है।
  • इसके बाद, केले के पत्तों की सहायता से जमीन पर एक गोलाकार चंद्रमा की आकृति का निर्माण किया जाता है।
  • फिर बांस के बने हुए सूप और डालियों में तरह-तरह के मौसमी फल, पारंपरिक मिठाइयां, खीर, और घी में बनी पूड़ियां आदि पकवान सजाकर रखे जाते हैं।
  • इसके उपरांत सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। उन्हें चंदन, दूर्वा, फल, फूल, मिठाई और खीर अर्पित कर विधि-विधान से पूजा जाता है।
  • गणपति बप्पा को विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट और मीठे व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
  • जैसे ही आसमान में चंद्रदेव के दर्शन होते हैं, वैसे ही व्रती महिलाएं फलों और पकवानों से सजे सूप को अपने दोनों हाथों में उठाकर चंद्रदेव को अर्घ्य देती हैं।
  • इस दौरान एक विशेष नियम का पालन करना बेहद जरूरी है। चंद्रमा की पूजा करते समय कभी भी सीधे चांद की ओर नहीं देखना चाहिए। इस दिन अर्घ्य हमेशा परोक्ष रूप से ही दिया जाता है, यानी या तो पानी के बर्तन में बनने वाले चंद्रमा के प्रतिबिंब को देखकर या फिर अपनी नजरों को नीचे झुकाकर अर्घ्य अर्पण किया जाता है।
  • चंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें पवित्र दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है।
  • मिथिलांचल में कई स्थानों पर इस दिन घर के पुरुष सदस्यों द्वारा एक विशेष रस्म निभाई जाती है, जिसे मारर भांगना (मिट्टी के बर्तनों को फोड़ना) कहा जाता है।
  • पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में बड़े ही प्रेम के साथ प्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसके बाद सभी मिलकर भोजन ग्रहण करते हैं।
  • इस विशेष दिन पर महिलाएं बांस के खास बर्तनों में बेहद श्रद्धा के साथ एक विशेष प्रकार की स्वादिष्ट खीर बनाती हैं, जिसका विशेष भोग चंद्रदेव को लगाया जाता है।

चौरचन पूजा 2026: चांद पूजा का सटीक समय

इस वर्ष चंद्र देव की पूजा करने का सबसे सटीक और कल्याणकारी समय शाम 5:54 बजे से लेकर रात 07:36 बजे तक रहेगा। इसी समय के दौरान चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे फलदायी माना गया है।

चौरचन पूजा की विशेष आरती

चंद्र देव की प्रसन्नता के लिए पूजा के अंत में इस आरती का गान अवश्य करना चाहिए:

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।

चौरचन पूजा के कल्याणकारी मंत्र

पूजा के समय नीचे दिए गए दो प्रमुख मंत्रों का उच्चारण करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है:

  • प्रथम मंत्र: दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम्॥
    (इस मंत्र का महत्व यह है कि चंद्र देव की पूजा के समय परिवार का हर एक सदस्य अपने हाथ में कोई न कोई फल लेकर इस मंत्र का जाप करता है और फिर चंद्र देव को नमन करता है।)

  • द्वितीय मंत्र: सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।।
    (धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष मंत्र का जाप करते हुए चंद्र देव की आराधना करने से इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से लगने वाले किसी भी तरह के पाप या कलंक से मुक्ति मिल जाती है।)

चौरचन पूजा का विशेष महाभोग

इस पावन पर्व में भगवान को चढ़ाया जाने वाला भोग अत्यंत शुद्धता से तैयार किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें शामिल होती हैं:

  • खीर: यह इस पावन पर्व का सबसे प्रमुख और अनिवार्य भोग है, जिसे चावल या फिर साबूदाने की मदद से बेहद गाढ़ा बनाया जाता है।
  • पूड़ी: शुद्ध घी में छानी गई खस्ता पूड़ियां।
  • पिरुकिया (गुझिया): सूजी और खोए से भरी हुई पारंपरिक गुझिया।
  • खाजा और लड्डू: तरह-तरह के मीठे व्यंजन।
  • ताजे फल: पूजा में मुख्य रूप से पका हुआ केला, खीरा, शरीफा और संतरा शामिल किया जाता है।

इन सभी पवित्र और स्वादिष्ट सामग्रियों को बांस से बने सुंदर सूपों में अच्छे से सजाकर आदरपूर्वक चंद्रदेव को अर्पित किया जाता है।

चौरचन पूजा का पारंपरिक लोक गीत

मिथिलांचल में किसी भी त्योहार की पूर्णता उसके पारंपरिक गीतों के बिना अधूरी है। चौरचन के अवसर पर महिलाएं इस मधुर लोक गीत को गाती हैं:

चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
घर अंगना हम नीक सं निपबै
घर अंगना हम नीक सं निपबै
पूजा के करबै ओरीयान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
छांछि मटकुरि में दही जमेबै
छांछि मटकुरि में दही जमेबै
डाली पर रखबै पकबान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान,
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
केरा, नरियल मधुर मंगेबाई
केरा, नरियल मधुर मंगेबाई
सङ्गेह सुपारी आ पान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान,
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
कल जोड़ी सब गोटे आशीष मंगबै
कल जोड़ी सब गोटे आशीष मंगबै
अंगना में आता भगवान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान,
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप