पश्चिम बंगाल की राजनीति में खलबली, ममता बनर्जी के संपर्क में टीएमसी के 3 बागी सांसद राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
एनडीए की संसदीय बैठक से तीन बागी सांसदों की लगातार दूसरी बार गैरमौजूदगी ने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है, जबकि टीएमसी ने उनके संपर्क में होने का दावा किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से गहमागहमी तेज हो गई है। टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) का हिस्सा बनने वाले 20 सांसदों की एकता पर अब बड़े सवाल उठने लगे हैं। इसकी मुख्य वजह एनडीए संसदीय दल की बैठक से इन सांसदों का लगातार नदारद रहना है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब यह चर्चा जोरों पर है कि क्या बागी सांसद फिर से घर वापसी की तैयारी कर रहे हैं। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने खुलकर दावा किया है कि कुछ बागी सांसद सीधे उनके संपर्क में हैं और अपनी पुरानी पार्टी में लौटने के रास्तों पर विचार कर रहे हैं।

लगातार दूसरी बैठक से बनाई दूरी

संसद परिसर में बीते मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी जिसे 'मंगल मिलन' का नाम दिया गया था। इस बैठक में टीएमसी से बागी होकर एनसीपीआई में शामिल होने वाले 20 सांसदों में से केवल 17 ही उपस्थित हो सके। तीन सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान लगातार दूसरी बार इस बैठक में शामिल नहीं हुए। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली बार हुई बैठक में भी यही तीनों नेता गायब थे। इन तीनों का बार-बार बैठक से दूर रहना राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है कि आखिर इसके पीछे की असली वजह क्या है।

सुवेंदु अधिकारी का स्पष्टीकरण

बैठक में इन तीन सांसदों की गैरमौजूदगी पर उठे सवालों के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद एक सफाई दी है। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इन सांसदों की अनुपस्थिति को किसी भी तरह के आपसी मतभेद या नाराजगी से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी 20 सांसद एकजुट हैं और आगे से जब भी बैठक होगी, ये सभी एक साथ दिखाई देंगे। हालांकि, सियासी गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि सब कुछ ठीक है, तो आखिर वही तीन नाम बार-बार चर्चा में क्यों आ रहे हैं।

दोपहर के भोज में जुटे सभी सांसद

राजनीतिक उठापटक के बीच एक दिलचस्प नजारा तब दिखा जब वही तीनों सांसद, जो एनडीए की मुख्य बैठक से दूर थे, बाद में बंग भवन पहुंचे। वहां सुवेंदु अधिकारी की ओर से एक विशेष दोपहर के भोज का आयोजन किया गया था। इस लंच में एनसीपीआई में शामिल हुए सभी 20 सांसदों ने हिस्सा लिया। इस भोज में पारंपरिक बंगाली व्यंजनों का प्रबंध किया गया था, जिसमें हिल्सा मछली, झींगे और छोले की दाल मुख्य आकर्षण थे। इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी वहां मौजूद थे। माना जाता है कि इन दोनों नेताओं ने टीएमसी में हुई बगावत को अंजाम देने में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई है। बीजेपी के वरिष्ठ सूत्रों का दावा है कि ये तीनों सांसद मजबूती से एनडीए के साथ खड़े हैं और उनकी अनुपस्थिति केवल एक रणनीतिक निर्णय था।

तकनीकी पेंच और अयोग्यता का खतरा

इस पूरे मामले में एक और पेचीदा पहलू कानूनी अड़चनों का है। लोकसभा अध्यक्ष ने अभी तक इन 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। स्थिति यह है कि लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी भी इनका उल्लेख तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के रूप में ही हो रहा है। सदन के अंदर भी, जब ये सांसद अपनी बात रखते हैं, तो टीवी प्रसारण में उनकी पार्टी के नाम के आगे टीएमसी ही लिखा दिखाई देता है। इतना ही नहीं, स्पीकर के अंतिम निर्णय तक इन्हें सदन में टीएमसी के अन्य सांसदों से अलग बैठने का निर्देश दिया गया है।

दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष के पास एक याचिका दायर कर दी है। इसमें उन्होंने मांग की है कि इन 20 सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया जाए। इन तमाम तकनीकी अड़चनों और कानूनी दांव-पेचों के बीच अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इन 20 सांसदों का राजनीतिक भविष्य क्या होगा और क्या टीएमसी का दावा सच साबित होगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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