नेपाल में कुदरत का कहर: तबाही के बाद 600 बच्चे अब भी लापता, मलबे में जिंदगी तलाश रही सेना विश्व 6 घंटे पहले 2
नेपाल में आई विनाशकारी आपदा के 10वें दिन भी राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जहां मलबे से लोगों को निकालने की कोशिशों के बीच रसुवा और नुवाकोट से लगभग 600 बच्चे और कई शिक्षक लापता हैं।

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। आपदा के 10वें दिन भी रसुवा से लेकर नुवाकोट जैसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में सेना के जवान दिन-रात मुस्तैदी से मलबे को हटाकर जिंदगियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस भयानक संकट के बीच एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जुटाए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस तबाही के बाद रसुवा और नुवाकोट जिलों से लगभग 600 बच्चे लापता हैं, जिनका अब तक कुछ पता नहीं चल सका है।

लापता बच्चों और शिक्षकों के आंकड़े

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों और स्कूल स्टाफ की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार स्थिति इस प्रकार है:

  • रसुवा जिला: इस क्षेत्र में करीब 280 बच्चे लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिले के 16 शिक्षकों का भी अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
  • नुवाकोट जिला: यहां करीब 300 से 350 बच्चे लापता सूची में दर्ज हैं। अधिकारियों के मुताबिक कुछ लापता छात्रों का पता चला है, लेकिन कम से कम 300 छात्र अब भी लापता हैं। इस जिले से 6 शिक्षक भी लापता बताए जा रहे हैं।
  • स्कूलों पर असर: नेपाल के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस आपदा से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों के कुल 22 स्कूल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनमें से 12 स्कूल पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं।

मौत का आंकड़ा और बचाव अभियान की चुनौतियां

नेपाल में आई इस भयानक आपदा की वजह से अब तक कुल 1283 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, आपदा के बाद से लापता हुए 5 हजार से ज्यादा लोगों को खोजने के लिए तलाश अभियान लगातार चलाया जा रहा है। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राहत दलों ने अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाकर निकाला है।

इस समय सेना और रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों (टनल) में फंसे कर्मचारी हैं। सुरंगों में भारी मात्रा में कीचड़ और मलबे के जमा होने के कारण इन कर्मचारियों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। सेना के जवान लगातार इस मलबे को साफ करने का काम कर रहे हैं ताकि अंदर फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

मलबे के बीच से दिखा जिंदगी का चमत्कार

इस भीषण तबाही और हर तरफ फैले दुख के माहौल के बीच शुक्रवार को एक बड़ी उम्मीद की किरण दिखाई दी। आपदा के 10वें दिन त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूरों को सुरक्षित जीवित बाहर निकाला गया है। सुरंग के अंदर भयानक गाद और कीचड़ भरा हुआ था, लेकिन सेना के जवानों के कड़े प्रयासों के कारण इन दोनों श्रमिकों को नया जीवन मिल सका।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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