विश्व
8 घंटे पहले
5
विचारों
नुवाकोट में बरामद हुए शवों ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और भीषण सैलाब के चलते हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, पूरे देश में मरने वालों की संख्या अब 962 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 4 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल नुवाकोट जिले के विदुर नगरपालिका स्थित बेत्रावती गांव में राहत दल को एक बड़ी कामयाबी मिली, लेकिन यह दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला था। यहां मलबे में दबे एक मकान से 23 शव बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, ये सभी लोग संभवतः तीर्थयात्री थे जो बाढ़ की चपेट में आ गए।
शवों की पहचान की चुनौती
राहत और बचाव कार्यों में तैनात पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मलबे की तलाशी के दौरान उन्हें एक मकान के भीतर से 21 शव मिले, जबकि 2 शव मलबे के बाहर से बरामद किए गए। यह तीन मंजिला इमारत 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी के उफान और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण पूरी तरह जमींदोज हो गई थी। पुलिस को संदेह है कि जैसे ही पानी का स्तर बढ़ा, लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल पर चले गए थे, लेकिन प्रकृति के विकराल रूप के आगे वे टिक नहीं पाए। इन शवों की शिनाख्त की प्रक्रिया अभी जारी है।
गोसाईंकुंड जा रहे तीर्थयात्री होने का अनुमान
नुवाकोट के एसपी विपिन रेग्मी ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बचाव टीम को एक कमरे के भीतर से 21 लोगों के शव एक साथ मिले हैं। उन्होंने कहा कि मृतकों के साथ मिले बैगों से यह संभावना प्रबल हो गई है कि ये सभी गोसाईंकुंड की यात्रा पर निकले तीर्थयात्री थे। इनमें से एक शव किसी विदेशी नागरिक का होने का भी अनुमान है। एसपी रेग्मी ने बताया कि एक महिला का शव बरामद हुआ है, जिसने एक छोटी बच्ची को अपनी गोद में मजबूती से जकड़ा हुआ था। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर राहतकर्मी भी स्तब्ध हैं। ऐसा लगता है कि बाढ़ से बचने के लिए सभी लोग एक सुरक्षित स्थान की तलाश में ऊपरी मंजिल पर एकत्रित हुए थे, लेकिन इमारत गिरने से वे मलबे में दब गए। फिलहाल 8 शवों को त्रिशूली अस्पताल भेज दिया गया है, जबकि अन्य शवों को वहां से हटाने का काम चल रहा है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और अन्य लापता लोगों की स्थिति
आपदा का असर केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है। रसुवा जिले के उत्तरगया गांव से करीब 350 छात्रों के लापता होने की सूचना है, जिनकी तलाश युद्ध स्तर पर की जा रही है। दूसरी ओर, त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 40-42 इंजीनियरों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और वहां बचाव अभियान लगातार छठे दिन भी बाधित रहा। इसके अतिरिक्त त्रिशूली 3B हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 118 कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस कठिन समय में नेपाली सेना के साथ भारतीय रेस्क्यू दल ने भी मोर्चा संभाल रखा है। भारतीय विशेषज्ञों की टीम विषम भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के बावजूद लगातार सक्रिय है और उन्हें रसुवा के चिलीमे तथा लांगटांग में टनल के अंदर फंसे लोगों को निकालने में कुछ शुरुआती सफलताएं भी मिली हैं।
Comments
0 comment