बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर सख्त हुआ NCPCR, Meta India के शीर्ष अधिकारियों को भेजा समन भारत एक घंटा पहले 4
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta India के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को सुनवाई के लिए तलब किया है।

Meta इंडिया के अधिकारियों को तलब

बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री यानी CSEAM वाले विज्ञापनों के मामले को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। आयोग ने Meta इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को आधिकारिक तौर पर समन जारी किया है। यह कार्रवाई उस औपचारिक जांच का हिस्सा है जिसे आयोग ने इस गंभीर मामले की तह तक जाने के लिए शुरू किया है। इस मामले में सुनवाई के लिए 16 सितंबर (बुधवार) की तारीख निर्धारित की गई है।

नोटिस और जवाब का सिलसिला

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 3 जुलाई 2026 को हुई थी, जब NCPCR ने पहली बार Meta को नोटिस भेजकर CSEAM विज्ञापनों के विषय में जवाब मांगा था। मेटा की तरफ से लगभग एक सप्ताह का समय लेने के बाद अपना जवाब पेश किया गया। हालांकि, प्राप्त जवाब से आयोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ और तथ्यों की सच्चाई जानने के लिए उसने मामले की औपचारिक जांच के आदेश दिए।

जांच के लिए फिर से बुलावा

इसी जांच की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आयोग ने Meta इंडिया के शीर्ष अधिकारियों को फिर से समन भेजा है। इस सुनवाई के दौरान NCPCR इस बात पर मंथन करेगा कि Meta इस समस्या को रोकने के लिए वास्तव में क्या कदम उठा रहा है और इस विषय से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

नीतियों में किया बदलाव

आयोग की निरंतर सख्ती का असर भी देखने को मिला है। दबाव में आकर Meta ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की रिपोर्टिंग करने की अपनी नीतियों में संशोधन किया है। अब कंपनी ने इस बात पर सहमति जताई है कि ऐसे आपत्तिजनक मामलों की जानकारी वे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को साझा करेंगे।

बेंगलुरु के मामले में भी सख्त रुख

केवल मेटा ही नहीं, बल्कि अन्य मामलों में भी आयोग सक्रिय है। बेंगलुरु में Capgemini द्वारा संचालित एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ हुए कथित शोषण के मामले में भी NCPCR ने कार्रवाई की है। आयोग ने इस सिलसिले में Capgemini के एक उपाध्यक्ष (VP) को समन जारी किया है ताकि घटना के लिए जवाबदेही तय की जा सके।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की नजर

बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार कई अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी संवाद कर रही है। इन बातचीत का मुख्य उद्देश्य ऐसी हानिकारक सामग्री को पहचानना और उन्हें तुरंत हटाना है जो बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप