क्या अब ब्रिटेन का होगा विखंडन? स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की आजादी को लेकर बड़ी हलचल विश्व एक घंटा पहले 6
वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेताओं ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे ब्रिटेन के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अलगाव की मांग तेज हो गई है।

ब्रिटेन के सामने अस्तित्व का संकट

एक समय था जब ब्रिटेन का साम्राज्य दुनिया के एक बड़े भूभाग पर फैला हुआ था और ब्रिटिश हुकूमत दूसरे देशों की सीमाओं का निर्धारण करती थी। हालांकि, अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं और स्वयं ब्रिटेन को अपने ही आंतरिक हिस्सों के अलगाव का डर सता रहा है। वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के प्रमुख नेताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक समझौते ने ब्रिटिश राजनीति में हलचल मचा दी है। इन क्षेत्रों ने अपनी स्वायत्तता को बढ़ाने और भविष्य में आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग को औपचारिक रूप दिया है, जिससे ब्रिटेन के टूटने का खतरा गहरा गया है।

समझौते का मुख्य आधार और चेतावनी

वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के बड़े नेताओं ने मिलकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम और उनकी सरकार को एक स्पष्ट चेतावनी दी है। इन नेताओं का स्पष्ट कहना है कि लंदन की सरकार को अब संवैधानिक बदलावों के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए। इनका तर्क है कि इन क्षेत्रों का भविष्य यूरोपियन यूनियन के साथ बेहतर है। समझौते में वेस्टमिंस्टर, यानी ब्रिटिश संसद की भूमिका पर तीखा प्रहार करते हुए कहा गया है कि, इन द्वीपों और पूरी दुनिया के लिए यह साफ संकेत है कि वेस्टमिंस्टर का युग अब समाप्ति की ओर है। यह संदेश ब्रिटिश सत्ता के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

जनमत संग्रह और संवैधानिक अधिकार

यह समझौता वेल्स के कार्डिफ शहर में शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद सामने आया है। इस स्थिति को लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम की पहले की गई टिप्पणियां भी चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री बर्नहैम ने पूर्व में संकेत दिया था कि यदि आवश्यक सहमति बनती है, तो वे स्कॉटलैंड में आजादी के मुद्दे पर दोबारा जनमत संग्रह कराने की अनुमति दे सकते हैं। वहीं, उत्तरी आयरलैंड की स्थिति थोड़ी अलग है। वहां के पास गुड फ्राइडे एग्रीमेंट के तहत आयरलैंड के साथ फिर से जुड़ने का संवैधानिक अधिकार सुरक्षित है। इस समझौते के तहत मतदान की प्रक्रिया तब शुरू हो सकती है जब ऐसी परिस्थितियां नजर आएं कि वहां की जनता ब्रिटेन से अलग होने का मन बना चुकी है।

डोनाल्ड ट्रंप के बयान से बढ़ी बेचैनी

मौजूदा स्थिति को स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में आजादी के समर्थक दलों के सत्ता में आने से भी बल मिला है। ये दल लगातार अपने क्षेत्रों के भविष्य के लिए अधिक अधिकार और संप्रभुता की वकालत कर रहे हैं। इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप ने भी ब्रिटेन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी हालिया आयरलैंड यात्रा के दौरान संयुक्त आयरलैंड के समर्थन में अपनी बात रखी थी। ट्रंप ने उत्तरी आयरलैंड के आयरलैंड गणराज्य में विलय को एक अच्छा कदम बताया था। ट्रंप का यह बयान ब्रिटेन की सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक दबाव के समान है। फिलहाल, इन क्षेत्रों के बढ़ते कदमों से ब्रिटेन का भविष्य अनिश्चितता के दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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