आपातकाल अध्याय पर विवाद के बीच NCERT की बड़ी चेतावनी, फर्जी किताबों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शिक्षा एक महीने पहले 57
कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में आपातकाल चैप्टर को लेकर चल रहे विवाद पर NCERT ने स्पष्टीकरण दिया है। संस्था ने बताया कि सोशल मीडिया पर किताब का नकली संस्करण फैलाया जा रहा है।

फर्जी किताबों के प्रसार पर NCERT सख्त

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को लेकर जारी विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संस्था का कहना है कि बाजार और इंटरनेट पर इस किताब का एक नकली संस्करण प्रसारित किया जा रहा है। आधिकारिक तौर पर इस पर जानकारी देते हुए NCERT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया है कि उनकी किताबों की अनधिकृत और पायरेटेड कॉपियां डिजिटल और मुद्रित रूप में साझा की जा रही हैं।

क्या है मामला और NCERT की चेतावनी

विवाद के केंद्र में कक्षा 9 की किताब समाज को समझना: भारत और उससे परे का एक संस्करण है। NCERT ने साफ किया है कि किसी भी पुस्तक को आधिकारिक प्रकाशन से पहले वितरित करने की अनुमति नहीं दी जाती है। संस्था के अनुसार, अनौपचारिक स्रोतों से मिल रही जानकारी छेड़छाड़ की गई या पूरी तरह से मनगढ़ंत हो सकती है। NCERT ने चेतावनी दी है कि ऐसे अनधिकृत प्रसार करना कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत एक दंडनीय अपराध है। छात्रों और शिक्षकों को केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत विक्रेताओं से ही पुस्तकें लेने की सलाह दी गई है।

पाठ्यपुस्तक में आपातकाल का जिक्र

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पाठ्यपुस्तक के आपातकाल अध्याय में 1975 से 1977 के दौरान लगे आपातकाल का वर्णन है। इसमें बताया गया है कि कैसे आंतरिक अशांति के आधार पर आपातकाल लागू किया गया था, जिसके चलते मौलिक अधिकारों को निलंबित किया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया।

कर्नाटक में पाठ्यक्रम को लेकर भी विवाद

आपातकाल विवाद के अलावा, NCERT पर कर्नाटक में एक अन्य मामले को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षा अधिकार समूह पीएएफआरई ने कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक का नाम कृष्ण रखे जाने पर आपत्ति जताई है। समूह का आरोप है कि इसमें कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान और बसवन्ना व कुवेम्पु जैसे महान समाज सुधारकों के योगदान को नजरअंदाज कर पाठ्यक्रम का भगवाकरण किया जा रहा है। पीएएफआरई के संयोजक निरंजनारध्या वीपी ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत धार्मिक विषयों को जबरन शामिल करने की प्रक्रिया बताया है।

अनन्या जोशी पाबना की शिक्षा संवाददाता हैं, जो शिक्षा, परीक्षा और करियर से जुड़ी खबरें कवर करती हैं। प्रवेश परीक्षाओं, बोर्ड और करियर विकल्पों पर वे छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी देती हैं। उनका फोकस सही और समय पर मार्गदर्शन देने पर रहता है।

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