समंदर की लहरों को चूमती 1000 KM रफ्तार से वार! दुश्मन के युद्धपोतों का काल बनी NASM-MR का भारत ने किया सफल परीक्षण राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
DRDO ने स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण किया है। माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन से लैस यह मिसाइल 0.8 मैक की हाई-सबसोनिक रफ्तार से समंदर की सतह से सटकर दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाती है।

भारतीय नौसेना की मारक शक्ति में जल्द ही जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है। समंदर की शांत सतह को चीरते हुए जब अचानक एक स्वदेशी विध्वंसक हथियार लहरों से महज कुछ मीटर ऊपर तैरता हुआ आगे बढ़ता है, तो उसकी आहट तक दुश्मन के आधुनिक राडार सिस्टम पकड़ नहीं पाते। यह नजारा भले ही किसी फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा लगे, लेकिन यह भारत की नई सैन्य ताकत की हकीकत है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने चांदीपुर के तट से अपनी सबसे अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण कर समंदर में एक ऐसा पहरेदार तैनात कर दिया है, जिसकी पकड़ से बच पाना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल होगा। यह सिर्फ एक मिसाइल का टेस्ट नहीं, बल्कि नीले समंदर पर भारत की उस क्षमता का ऐलान है जो विदेशी घुसपैठियों के युद्धपोतों को जलसमाधि देने का दम रखती है।

ब्रह्मोस के बाद क्यों जरूरी थी NASM-MR

भारत के पास पहले से ही सुपरसोनिक ब्रह्मोस जैसी भारी मिसाइल मौजूद है, जो 400 से अधिक किलोमीटर तक मार करती है। लेकिन छोटे जहाजों, कोर्वेट्स और हेलीकॉप्टर ऑपरेशन्स के लिहाज से ब्रह्मोस बहुत भारी और महंगी साबित होती है। ठीक यहीं पर NASM-MR अपनी भूमिका निभाती है और कम व मध्यम दूरी के अभियानों के लिए एक सटीक तथा बजट-अनुकूल विकल्प मुहैया कराती है।

फ्रांस की एक्सोसेट या अमेरिका की हार्पून के मुकाबले यह मिसाइल भारतीय हेलीकॉप्टरों के वजन और मारक प्रोफाइल में एकदम सटीक बैठती है। इसके चलते भारत को अब विदेशी वेंडर्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

NASM-MR की पाँच बड़ी तकनीकी खूबियाँ

  • मारक क्षमता: मध्यम दूरी की श्रेणी वाली NASM-MR की आधिकारिक ऑपरेशनल रेंज करीब 55 से 70 किलोमीटर से शुरू होकर इसके एडवांस्ड वेरिएंट्स में 100 किलोमीटर से अधिक तक पहुँचती है, जो इसे तटीय सुरक्षा के लिए अचूक बनाती है।
  • रफ्तार: यह मिसाइल हाई-सबसोनिक स्पीड (लगभग 0.8 से 0.9 मैक) पर उड़ान भरती है, यानी समंदर की सतह के बिल्कुल करीब यह करीब 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दुश्मन पर झपटती है।
  • पेलोड और वॉरहेड: युद्धपोतों को चीरने के लिए इसमें लगभग 100 से 150 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव प्री-फ्रेगमेंटेड (Armour-Piercing) वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो एक ही झटके में भारी तबाही मचाता है।
  • अनुमानित लागत: अमेरिकी ‘हार्पून’ या फ्रांसीसी ‘एक्सोसेट’ जैसी विदेशी मिसाइलों की तुलना में स्वदेशी उत्पादन के कारण NASM-MR की लागत बेहद कम (करीब एक-तिहाई) है, जिससे सेना इसे बड़ी संख्या में तैनात कर सकती है।
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: शुरुआती दौर में इसे नौसेना के सी-किंग और नए MH-60R रोमियो हेलीकॉप्टरों से दागने के लिए कस्टमाइज किया गया है, जिसे बाद में फाइटर जेट्स और जहाजों पर भी इंटीग्रेट किया जाएगा।

माणिक इंजन ने दी ताकत

यह मिसाइल भारत के स्वदेशी माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन से लैस है, जो इसे 300 से 350 किलोमीटर की मारक क्षमता प्रदान करता है। 0.8 मैक (लगभग 1000 किमी/घंटा) की हाई-सबसोनिक स्पीड और 100 से 150 किलोग्राम के वॉरहेड के साथ यह लहरों से सटकर दुश्मन के युद्धपोतों को नेस्तनाबूद करने वाला अचूक हथियार है।

वैश्विक मिसाइलों के सामने कहाँ खड़ी है NASM-MR

अलग-अलग देशों की एंटी-शिप मिसाइलों से तुलना करने पर NASM-MR की खासियत और साफ नजर आती है।

  • NASM-MR (भारत): रेंज 55–100 किमी, स्पीड 0.8 मैक (सबसोनिक), वॉरहेड करीब 100–150 किग्रा। यह सी-स्किमिंग तकनीक वाली, बेहद किफायती और पूरी तरह स्वदेशी मिसाइल है।
  • Exocet AM39 (फ्रांस): रेंज 70–180 किमी, स्पीड 0.9 मैक (सबसोनिक), वॉरहेड 165 किग्रा। यह वैश्विक रूप से परीक्षित है, लेकिन भारत के लिए बहुत महंगी पड़ती है।
  • Harpoon Block II (अमेरिका): रेंज 124 किमी से अधिक, स्पीड 0.7 मैक (सबसोनिक), वॉरहेड 221 किग्रा। इसका पेलोड भारी है, लेकिन यह कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और शर्तों के अधीन है।
  • C-802 (चीन/पाकिस्तान): रेंज 120 किमी, स्पीड 0.9 मैक (सबसोनिक), वॉरहेड 165 किग्रा। यह पाकिस्तानी नौसेना का मुख्य हथियार है, मगर राडार ट्रैकिंग में कमजोर मानी जाती है।

रेंज और स्पीड को लेकर अहम जानकारी

NASM-MR की ऑपरेशनल मारक क्षमता 55 से 100 किलोमीटर के बीच है। यह मिसाइल हाई-सबसोनिक रफ्तार (करीब 0.8 मैक या 1000 किमी/घंटा) से दुश्मन के ठिकानों की ओर बढ़ती है।

सी-स्किमिंग तकनीक का फायदा

सी-स्किमिंग का मतलब है कि मिसाइल लॉन्च होने के बाद समंदर की लहरों से महज कुछ मीटर की ऊँचाई पर तैरते हुए आगे बढ़ती है। इतनी कम ऊँचाई और तेज रफ्तार के कारण दुश्मन के युद्धपोतों पर लगे राडार और एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक नहीं कर पाते और यह सीधे जहाज के हल (Hull) को फाड़ देती है।

विदेशी मिसाइलों से कितनी सस्ती

स्वदेशी डिजाइन और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के कारण NASM-MR की उत्पादन लागत अमेरिकी हार्पून और फ्रांसीसी एक्सोसेट मिसाइलों की तुलना में लगभग एक-तिहाई (30-40%) कम बैठने का अनुमान है। इससे भारतीय नौसेना बजट की चिंता किए बिना इसे भारी तादाद में अपने बेड़े में शामिल कर सकती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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