नैनीताल के किलबरी में छिपा है नयनादेवी जलकुंड: प्रकृति की गोद में बसा एक नया पर्यटन केंद्र उत्तराखंड एक घंटा पहले 4
उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित किलबरी के घने जंगलों के बीच नयनादेवी जलकुंड पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभरा है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जल संरक्षण के प्रयासों के लिए चर्चा में है।

नैनीताल की खूबसूरती का नया पड़ाव

उत्तराखंड का नैनीताल शहर अपनी प्रतिष्ठित नैनी झील के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के आसपास कई ऐसी जगहें हैं जो अभी भी लोगों की नज़रों से छिपी हुई हैं। इन्हीं में से एक खास जगह है नैनीताल के पास स्थित किलबरी का नयनादेवी जलकुंड। यह जलकुंड घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित है, जो इसे प्रकृति के करीब सुकून के पल बिताने के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाता है। यदि आप शहर की भीड़भाड़ से दूर एकांत में समय बिताना चाहते हैं, तो यह जलकुंड आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है।

किलबरी-पंगोट मार्ग पर स्थित है यह स्थल

यह खूबसूरत जलकुंड किलबरी-पंगोट मार्ग पर घने वनों के बीच बना हुआ है। चारों ओर फैली हरियाली और विशाल पहाड़ों की श्रृंखला इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। यहाँ पहुँचने पर पर्यटकों को एक ऐसा शांत वातावरण मिलता है जो शहर की हलचल से बिल्कुल जुदा है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी जन्नत से कम नहीं है। नैनीताल शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह क्षेत्र बारा पत्थर-विनायक मोटर मार्ग से किलबरी जाने वाले रास्ते पर पड़ता है। यहाँ तक पहुँचने का रास्ता खुद में एक रोमांचक अनुभव प्रदान करता है, जहाँ घुमावदार पहाड़ी सड़कों और घने जंगलों के नज़ारे सैलानियों का मन मोह लेते हैं।

जलकुंड की बनावट और क्षमता

वन विभाग की ओर से तैयार किए गए इस जलाशय का निर्माण काफी वैज्ञानिक और सुनियोजित तरीके से किया गया है। यह जलकुंड केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी बनाया गया है। इस जलकुंड की लंबाई लगभग 150 मीटर है, जबकि इसकी चौड़ाई करीब 20 मीटर है। इसकी गहराई लगभग 1.5 मीटर मापी गई है। इस विशाल जलकुंड की जल धारण क्षमता लगभग 60 लाख लीटर है, जो इसे इलाके का एक प्रमुख जल स्रोत बनाता है।

मानसून में निखरती है इसकी प्राकृतिक छटा

मानसून के मौसम में नयनादेवी जलकुंड की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के बाद जब पहाड़ बादलों और कोहरे की चादर ओढ़ लेते हैं, तो यहाँ का नज़ारा बेहद जादुई और मनमोहक हो जाता है। पानी से लबालब भरा जलकुंड, चारों तरफ फैली हरियाली और धुंध में डूबी पहाड़ियां फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। कैमरे में प्रकृति के बदलते रंगों को कैद करने के लिए यह एक आदर्श लोकेशन साबित हो रही है।

वन्यजीवों और पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना

इस जलकुंड का निर्माण केवल इंसानों के मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए भी एक मील का पत्थर है। जंगल के बीच बने इस जलाशय का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय वन्यजीवों को मिलता है। पानी का प्राकृतिक स्रोत पास होने के कारण जंगली जानवरों को पानी की तलाश में दूर-दूर तक भटकना नहीं पड़ता। इसके अतिरिक्त, किलबरी क्षेत्र अपनी पक्षियों की विविधता के लिए भी जाना जाता है। नयनादेवी जलकुंड के आसपास का शांत वातावरण पक्षी प्रेमियों के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करता है, जहाँ पर्यटक प्रकृति के साथ-साथ पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों को भी देख सकते हैं।

इको-टूरिज्म को बढ़ावा

पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नयनादेवी जलकुंड के आसपास एक इको पार्क भी विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना है। यहाँ आकर पर्यटक न केवल पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती को करीब से देख सकते हैं, बल्कि शांत वातावरण में बैठकर सुकून के कुछ पल भी बिता सकते हैं। कुल मिलाकर, नैनीताल का यह नया पर्यटन स्थल उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो पहाड़ों की शांति, जंगलों की हरियाली और बादलों के लुका-छिपी वाले नजारों के बीच अपनी छुट्टियां बिताना चाहते हैं। यह जगह न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए बल्कि नेचर फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी एक खास डेस्टिनेशन बन गई है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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