नैनीताल के नयना देवी मंदिर के गर्भगृह का अनोखा रहस्य, साल में सिर्फ एक बार इस खास परिवार को मिलती है अंदर जाने की अनुमति उत्तराखंड 4 घंटे पहले 2
उत्तराखंड के प्रसिद्ध नैनीताल में स्थित मां नयना देवी मंदिर के गर्भगृह से जुड़ी कुछ बेहद प्राचीन और अनोखी मान्यताएं हैं, जहां साल में केवल एक बार शाह परिवार के सदस्यों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

उत्तराखंड के बेहद खूबसूरत और सुप्रसिद्ध पर्वतीय क्षेत्र नैनीताल में स्थित मां नयना देवी मंदिर न केवल देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का एक बड़ा केंद्र है, बल्कि अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य और अनोखी परंपराएं भी समेटे हुए है। इस मंदिर की महिमा और इसके प्रति लोगों की श्रद्धा दूर-दूर तक फैली हुई है। इसके बावजूद, बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि इस मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित रहता है। हालांकि, वर्ष में एक ऐसा विशेष दिन भी आता है, जब इस कड़े नियम में एक खास परिवार को विशेष छूट दी जाती है।

गर्भगृह का अनोखा नियम और शाह परिवार का संबंध

सामान्य दिनों में मां नयना देवी मंदिर के गर्भगृह के भीतर जाने की अनुमति किसी भी आम श्रद्धालु को नहीं दी जाती है। भक्त केवल बाहर से ही देवी मां के दर्शन कर सकते हैं। लेकिन साल में एक विशेष अवसर ऐसा आता है, जब मंदिर के निर्माण और इतिहास से गहराई से जुड़े शाह परिवार के वंशजों को गर्भगृह के भीतर जाने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस खास दिन पर शाह परिवार के सदस्य गर्भगृह के अंदर प्रवेश करते हैं और देवी मां की अत्यंत विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न करते हैं। इस अनूठी परंपरा के पीछे मंदिर की स्थापना और देवी की मूर्ति से जुड़ी एक बहुत ही पुरानी और ऐतिहासिक कहानी बताई जाती है।

नंदा देवी महोत्सव और नैनीझील की दो मछलियों की मान्यता

इस मंदिर की विशेषता केवल इसके गर्भगृह और शाह परिवार तक ही सीमित नहीं है। मंदिर से जुड़ी कई अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं भी इसे बेहद खास बनाती हैं। इनमें से प्रमुख हैं:

  • नन्दा देवी महोत्सव: इस महोत्सव के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ता है और पूरे क्षेत्र में एक अलग ही भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है।
  • नैनीझील की दो मछलियां: मंदिर के ठीक सामने स्थित प्रसिद्ध नैनीझील में पाई जाने वाली दो विशेष मछलियों को लेकर भी स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। इन मछलियों के दर्शन को देवी मां के आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है।

यही वजह है कि यह मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और कौतूहल का विषय बना हुआ है, जहां हर साल लाखों की संख्या में लोग अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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