नागौर का अनूठा पशुपतिनाथ मंदिर: 16 वर्ष की कठिन तपस्या से साकार हुआ धाम, हरिद्वार के गंगाजल से नित्य अभिषेक राजस्थान एक घंटा पहले 2
नागौर के मांझवास गांव में नेपाली शैली में बना पशुपतिनाथ मंदिर आस्था और वास्तुकला का अनूठा संगम है, जिसे संत गणेशनाथ की 16 वर्ष की तपस्या ने आकार दिया।

नागौर जिले के मांझवास गांव में बना पशुपतिनाथ मंदिर श्रद्धा और विलक्षण वास्तुकला का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है। यह मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है और दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

तपस्या से जन्मा धाम

इस मंदिर के निर्माण के पीछे संत गणेशनाथ की कठोर साधना की कहानी है। बताया जाता है कि उन्होंने इस संकल्प को पूरा करने के लिए 16 वर्षों तक अन्न ग्रहण नहीं किया। उनकी इसी अटूट तपस्या और समर्पण के फलस्वरूप यह धाम साकार हो सका।

नेपाली शैली की वास्तुकला

मंदिर की संरचना नेपाली शैली में गढ़ी गई है, जिसमें लकड़ी, लोहे और एल्युमिनियम का उपयोग किया गया है। इसकी बनावट इसे आसपास के अन्य मंदिरों से अलग और विशिष्ट पहचान देती है। गर्भगृह में विशाल अष्टधातु शिवलिंग स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है।

ज्योतिर्लिंगों में पूजन और गंगाजल से अभिषेक

मान्यता है कि शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व इसे 11 ज्योतिर्लिंगों में ले जाकर विधिवत पूजन कराया गया था। इसके बाद ही इसे यहां स्थापित किया गया। मंदिर में हरिद्वार से लाए गए गंगाजल से नियमित रूप से अभिषेक किया जाता है, जो इस धाम की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!