नागौर: मेड़ता अस्पताल में शुरू होगी पालना गृह की सुविधा, बेसहारा नवजातों को मिलेगा नया जीवन राजस्थान एक महीने पहले 47
नागौर के मेड़ता अस्पताल में जल्द ही एक विशेष पालना गृह स्थापित किया जाएगा, ताकि लावारिस छोड़े गए नवजात शिशुओं को सुरक्षित आश्रय और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

नवजातों की सुरक्षा के लिए नई पहल

नागौर जिले के मेड़ता अस्पताल में प्रशासन एक सराहनीय कदम उठाने जा रहा है। यहां जल्द ही पालना गृह की सुविधा शुरू की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन मासूम शिशुओं को बचाना है, जिन्हें कई बार मजबूरी या अन्य कारणों से सुनसान जगहों या सार्वजनिक स्थानों पर छोड़ दिया जाता है।

किस तरह काम करेगा पालना गृह

यह पालना गृह एक सुरक्षित व्यवस्था के तौर पर काम करेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी नवजात को छोड़ने का निर्णय लेता है, तो वह उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय यहां सुरक्षित छोड़ सकेगा। इसके बाद की प्रक्रिया के लिए अस्पताल प्रशासन और बाल कल्याण विभाग को जिम्मेदारी दी गई है।

स्वास्थ्य और कानूनी सुरक्षा का ध्यान

  • स्वास्थ्य जांच: पालना गृह में आने वाले शिशुओं की तुरंत मेडिकल जांच की जाएगी।
  • सुरक्षित भविष्य: बाल कल्याण विभाग कानूनी प्रक्रिया के जरिए बच्चों के पुनर्वास की व्यवस्था करेगा।
  • मृत्यु दर में कमी: इस व्यवस्था का लक्ष्य नवजात मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम करना है।

समाज में बढ़ेगी जागरूकता

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस सुविधा के माध्यम से न केवल बच्चों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि समाज में इस संवेदनशील विषय पर जागरूकता भी बढ़ेगी। यह कदम बेसहारा बच्चों को एक बेहतर भविष्य और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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