मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: 'आंखों के सामने जल गए ससुर', इलाज के लिए बेच दी थी जमीन फिर भी न बची जान बिहार एक महीने पहले 19
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में गुरुवार सुबह लगी भीषण आग में 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 10 मरीजों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। जमीन बेचकर ससुर का इलाज करा रही महिला ने बताया कि उनकी आंखों के सामने ही ससुर आग की लपटों में घिरकर जल गए।

बिहार के मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार की सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसे शायद वे जीवन भर नहीं भुला पाएंगे। अस्पताल के आईसीयू में लगी आग ने महज कुछ ही मिनटों में कई जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया।

कितने लोगों की गई जान

आधिकारिक तौर पर अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, हालांकि मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं कई लोगों का दावा है कि इस हादसे में 10 मरीजों की जान गई है।

जमीन बेचकर करा रही थीं ससुर का इलाज

मनियारी थाना क्षेत्र के बगाही गांव की रहने वाली संगीता कुमारी की आंखों में उस भयावह रात का मंजर अब भी ताजा है। संगीता बताती हैं कि उनके ससुर बृजनंदन राय एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद पिछले 4 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।

बेहतर इलाज की उम्मीद में परिवार ने उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में दाखिल कराया था। इलाज का खर्च जुटाने के लिए परिवार ने अपनी जमीन तक बेच दी थी, मगर किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यही अस्पताल उनकी मौत की वजह बन जाएगा।

आंखों के सामने जलते रहे ससुर

संगीता बताती हैं कि गुरुवार की सुबह करीब 3 बजे वह आईसीयू के बाहर बैठी हुई थीं। तभी अचानक अंदर अफरा-तफरी मच गई। मरीज और उनके परिजन दरवाजों तथा खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। जब उन्होंने आईसीयू के भीतर झांका तो उनके ससुर आग की लपटों से घिरे हुए थे।

मैं उन्हें बचाने के लिए अंदर भागना चाहती थी, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि एक कदम भी आगे नहीं रख सकी। मेरी आंखों के सामने मेरे ससुर जल रहे थे और मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी।

यह कहते-कहते संगीता फफक कर रो पड़ती हैं।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया खौफनाक मंजर

उस रात के मंजर को याद करते हुए प्रत्यक्षदर्शी शशांक कुमार आज भी सिहर उठते हैं। उनके मुताबिक, आईसीयू में करीब 30 से अधिक मरीज भर्ती थे। आग लगते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट के सहारे ही बाहर की ओर दौड़ पड़े, तो कुछ ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर निकलने की कोशिश की।

हम लोग अपने मरीजों को चादर में लपेटकर किसी तरह बाहर निकाल रहे थे। अगर शुरुआत में जिस बेड पर आग लगी थी, उसे तुरंत अलग कर दिया जाता, तो शायद हालात इतने भयावह नहीं होते।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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