मुंगेर: कच्ची कांवरिया पथ पर पहली बार तैनात हाईटेक मशीनें, हर श्रद्धालु का अब होगा सटीक हिसाब बिहार एक घंटा पहले 3
मुंगेर जिला प्रशासन ने श्रावणी मेले के दौरान कच्ची कांवरिया पथ पर पहली बार हाईटेक काउंटिंग डिवाइस और कैमरे लगाए हैं ताकि कांवरियों की सटीक संख्या का डेटा मिल सके और भविष्य में बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें।

श्रावणी मेले में नई तकनीक का इस्तेमाल

मुंगेर जिले में आयोजित होने वाले श्रावणी मेले के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकलने वाले कांवरियों की संख्या का अब आधिकारिक और सटीक रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस बार जिला प्रशासन ने एक बड़ा बदलाव करते हुए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने पहली बार 26 किलोमीटर लंबे कच्ची कांवरिया पथ पर अत्याधुनिक हेड काउंट कैमरे और ऑटोमैटिक काउंटिंग डिवाइस स्थापित किए हैं। इन उपकरणों के जरिए अब हर कांवरिया की गिनती संभव हो सकेगी, जिससे प्रशासन को यह स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी कि श्रावणी मेले के दौरान इस मार्ग से वास्तव में कितने श्रद्धालु गुजर रहे हैं।

अब तक सिर्फ अनुमान पर निर्भर थी व्यवस्था

विगत वर्षों तक मुंगेर के इस विशेष कच्ची कांवरिया पथ से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सही संख्या का कोई भी ठोस सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं था। हालांकि हर साल लाखों की तादाद में कांवरिये इसी रास्ते का उपयोग करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर प्रस्थान करते थे, लेकिन उनकी संख्या का आकलन केवल अटकलों और अनुमानों पर आधारित होता था। आंकड़ों के अभाव में प्रशासन को जमीनी स्तर पर सुविधाएं जुटाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस साल जिला प्रशासन ने इस पुरानी समस्या को पूरी तरह खत्म करने का बीड़ा उठाया है।

कैसे काम करेगी हाईटेक तकनीक

प्रशासन द्वारा कच्ची कांवरिया पथ के दो अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष रूप से हेड काउंट कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के साथ ही ऑटोमैटिक काउंटिंग डिवाइस भी सक्रिय किए गए हैं। इन मशीनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, स्वयं ही रास्ते से गुजरने वाले हर एक श्रद्धालु को गिनने में सक्षम हैं। प्रशासन के अधिकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस कवायद का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य ध्येय भविष्य के लिए एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार करना है।

डेटा से बढ़ेगी श्रद्धालुओं की सुविधाएं

सटीक आंकड़ों के माध्यम से जिला प्रशासन उन सभी कमियों को दूर करने की योजना बना रहा है जो अभी तक सुविधाओं के विस्तार में बाधक थीं। इन आंकड़ों से प्रशासन को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:

  • किन तारीखों पर भीड़ सबसे ज्यादा होती है, इसका स्पष्ट विश्लेषण किया जा सकेगा।
  • दिन के किस समय श्रद्धालुओं का दबाव अधिक रहता है, यह जानकारी उपलब्ध होगी।
  • किन विशेष स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं की अधिक आवश्यकता है, इसे चिन्हित किया जा सकेगा।

इन आंकड़ों के आधार पर ही आने वाले वर्षों में कांवड़ शिविरों की संख्या में इजाफा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पीने के पानी की व्यवस्था, शौचालय निर्माण, स्वास्थ्य शिविरों की स्थापना और एंबुलेंस की उपलब्धता को भी और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। डेटा आधारित सुरक्षा प्रबंधन से संपूर्ण श्रावणी मेले का संचालन पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित होने की उम्मीद है।

प्रशासन की बेहतर भविष्य की तैयारी

आईटी मैनेजर शाहिल सिंह ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मुंगेर में हेड काउंटिंग की यह व्यवस्था पहली बार शुरू की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कैमरों से प्राप्त होने वाला सटीक डेटा भविष्य की रणनीतियों को निर्धारित करने में मील का पत्थर साबित होगा। प्रशासन को स्पष्ट समझ मिलेगी कि यात्रा के दौरान किन क्षेत्रों में संसाधनों की सबसे अधिक जरूरत है। इन हाईटेक उपकरणों के उपयोग से न केवल यात्रा का प्रबंधन सुधरेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को भी अधिक सुरक्षित और सुगम अनुभव प्राप्त होगा। जिला प्रशासन का मानना है कि तकनीक का यह कदम आने वाले समय में श्रावणी मेले की व्यवस्थाओं को एक नए और बेहतर स्तर पर ले जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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