महाराष्ट्र
2 घंटे पहले
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विचारों
समाज में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब उसी पेशे से जुड़े किसी व्यक्ति के मन से इंसानी मौत के प्रति सम्मान और संवेदना मिट जाए तो सवाल खड़े होना लाज़मी है। मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम (KEM) अस्पताल की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार ने एक लाइव शो में मनोरंजन के नाम पर पोस्टमार्टम प्रक्रिया और शोध के लिए दान किए गए शवों का जिस तरह सरेआम भद्दा मजाक उड़ाया, उसने पूरी मेडिकल बिरादरी को कठघरे में खड़ा कर दिया।
सोशल मीडिया पर इस बयान का वीडियो वायरल होते ही जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया और अस्पताल प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। प्रशासन ने आरोपी छात्रा को तत्काल प्रभाव से 15 दिनों की फोर्स लीव पर भेज दिया है और उसके कॉलेज, हॉस्टल तथा अस्पताल परिसर में प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इस दौरान वह किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
विवाद से जुड़ी प्रमुख बातें
- विवादित बयान का वायरल वीडियो: कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक लाइव स्टैंड-अप शो के दौरान दर्शकों में बैठी केईएम अस्पताल की थर्ड-ईयर एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार ने मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन (शव विच्छेदन) के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों तथा उनके प्राइवेट पार्ट्स को लेकर आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी की।
- अस्पताल का कड़ा एक्शन: वीडियो वायरल होने और भारी जनाक्रोश के बाद केईएम अस्पताल के डीन हरीश पाठक ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और सेजल पवार को तत्काल प्रभाव से 15 दिनों की फोर्स लीव पर भेज दिया।
- परिसर और हॉस्टल में नो-एंट्री: अगले 15 दिनों तक छात्रा के केईएम अस्पताल परिसर, मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल में प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच: प्रशासन ने विस्तृत जांच के लिए एक पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जो अगले 7 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
- परिवार के हवाले: प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि वीडियो में दिख रही लड़की सेजल पवार ही है, कॉलेज प्रशासन ने उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया और इस कृत्य को पूरी तरह अस्वीकार्य माना है।
क्या मेडिकल एथिक्स भूल रहे हैं भावी डॉक्टर?
यह घटना केवल एक छात्रा के भद्दे मजाक या किसी स्टैंड-अप शो की विवादित क्लिप तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल एथिक्स पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। मेडिकल की पढ़ाई में एनाटॉमी और डिसेक्शन को बेहद गंभीर और सम्मानजनक प्रक्रिया माना जाता है। विज्ञान और समाज की भलाई के लिए मरणोपरांत देहदान करने वालों के शवों को कैडेवर (Cadaver) कहा जाता है, और छात्रों को पहली कक्षा में ही सिखाया जाता है कि इन मृत शरीरों का सम्मान उनके पहले शिक्षक की तरह किया जाना चाहिए।
एक लाइव शो में चंद पलों की वाहवाही और हंसी के लिए दान किए गए शवों के अंगों, पोस्टमार्टम की बारीकियों और प्राइवेट पार्ट्स का उपहास उड़ाना यह दर्शाता है कि भावी डॉक्टरों में कहीं न कहीं मानवीय संवेदना और पेशेवर गंभीरता की भारी कमी आ रही है। केईएम अस्पताल का यह कड़ा कदम अन्य मेडिकल छात्रों के लिए स्पष्ट संदेश है कि सोशल मीडिया अटेंशन के चक्कर में चिकित्सा पेशे की गरिमा और मर्यादा को तार-तार करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
सवाल-जवाब
सेजल पवार पर क्या कार्रवाई हुई और वह किस वर्ष की छात्रा हैं?
केईएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की थर्ड-ईयर (तृतीय वर्ष) की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार को विवादित बयान के बाद 15 दिनों की फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। साथ ही उनके कॉलेज, अस्पताल और हॉस्टल परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
विवाद कहां से शुरू हुआ और क्या आरोप हैं?
पूरा विवाद कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक लाइव शो से शुरू हुआ। आरोप है कि दर्शकों में बैठी सेजल पवार ने मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के अंगों और प्राइवेट पार्ट्स पर बेहद अमर्यादित और भद्दा मजाक किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
जांच के लिए क्या कदम उठाए गए और डीन का क्या कहना है?
डीन हरीश पाठक ने बताया कि मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने एक पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। प्रारंभिक पुष्टि के बाद छात्रा को उसके परिवार के हवाले कर दिया गया है।
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