MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन: हिंद महासागर में दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनेगा भारत का नया हथियार, अमेरिका के साथ हुई महाडील भारत 2 घंटे पहले 5
भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते के तहत MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने जा रहे हैं, जो हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की हर नापाक हरकत पर पैनी नजर रखने के साथ ही दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखेंगे।

हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की धमक

भारत और अमेरिका के बीच संपन्न हुई एक नई और महत्वपूर्ण रक्षा डील ने समुद्री सुरक्षा के समीकरण पूरी तरह से बदल दिए हैं। इस समझौते के केंद्र में है अत्याधुनिक MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन। यह ड्रोन न केवल भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताओं में अभूतपूर्व इजाफा करेगा, बल्कि यह हिंद महासागर में दुश्मन की हर चाल को भांपने में सक्षम होगा। 40 हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखने वाला यह ड्रोन समंदर की अथाह गहराइयों में छिपी पनडुब्बियों को भी आसानी से खोज निकालने की महारत रखता है। इस डील के बाद से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि अब मलक्का स्ट्रेट से लेकर अदन की खाड़ी तक भारत की नजर बेहद पैनी हो गई है।

समुद्र का खामोश शिकारी क्यों है यह ड्रोन

MQ-9B सी गार्डियन को अक्सर समंदर का खामोश शिकारी कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी शोर के दुश्मन के इलाके में प्रवेश कर सकता है। आसमान में घात लगाकर अपने लक्ष्य को भेदने में यह ड्रोन बेहद माहिर है। इसे प्रीडेटर ड्रोन के रूप में भी वैश्विक पहचान मिली है और अमेरिका ने दुनिया भर में अपने रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इसका प्रभावी इस्तेमाल किया है। अब यह तकनीक भारत के पास होने से भारतीय नौसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है। यह ड्रोन दुश्मन के उन्नत रडार सिस्टम को चकमा देने में भी पूरी तरह सक्षम है, जिसके कारण यह रक्षा और हमले दोनों ही मोर्चों पर बेहद घातक सिद्ध होता है।

तकनीकी क्षमता और विशेषता

इस ड्रोन की तकनीक इसे दुनिया के सबसे उन्नत सैन्य उपकरणों में से एक बनाती है। इसके मुख्य फीचर्स को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • रेंज: यह ड्रोन 8000 किलोमीटर के विशाल दायरे में कवरेज देने में सक्षम है।
  • उड़ान क्षमता: यह लगातार 30 घंटे तक हवा में मंडराने की अद्भुत ताकत रखता है।
  • ऊंचाई: इसकी परिचालन ऊंचाई 40 हजार से लेकर 50 हजार फीट के बीच रहती है।
  • पेलोड क्षमता: यह 2000 किलोग्राम तक के भारी बम और गाइडेड मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है।
  • गति: इसकी अधिकतम रफ्तार 450 किलोमीटर प्रति घंटा है।
  • सर्विलांस: इसमें लगा हाई डेफिनेशन कैमरा रीयल टाइम वीडियो फीड सीधे कमांड सेंटर को भेजता है।

तीनों सेनाओं की बढ़ेगी संयुक्त ताकत

यह रक्षा समझौता केवल नौसेना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत के तीनों सुरक्षा अंगों को मजबूती मिलेगी। सरकार द्वारा की गई इस डील के तहत कुल 31 MQ-9B ड्रोन खरीदे जा रहे हैं। इन ड्रोन्स का वितरण इस प्रकार होगा:

  • भारतीय नौसेना: निगरानी और समुद्री सुरक्षा के लिए 15 ड्रोन दिए जाएंगे।
  • भारतीय वायुसेना: रणनीतिक ऑपरेशंस के लिए 8 ड्रोन आरक्षित रहेंगे।
  • भारतीय थल सेना: अपने अभियानों के लिए 8 ड्रोन्स का संचालन करेगी।

यह सभी ड्रोन लेजर बम और गाइडेड मिसाइलों से लैस होंगे, जिससे ये सर्विलांस के साथ-साथ सीधे हमले करने की क्षमता भी रखेंगे। गौरतलब है कि भारत साल 2020 से ही ऐसे दो ड्रोन किराए पर लेकर उपयोग कर रहा है, जिन्होंने अब तक 13 हजार घंटे से अधिक के सफल मिशन पूरे किए हैं।

दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना अब आसान

समुद्र के अंदर सबसे बड़ा खतरा पनडुब्बियों से होता है, जिन्हें ट्रैक करना बेहद जटिल कार्य माना जाता है। चीन अक्सर अपनी परमाणु पनडुब्बियों को हिंद महासागर में जासूसी के लिए भेजता है। MQ-9B सी गार्डियन में एंटी सबमरीन वॉरफेयर के लिए विशेष व्यवस्था है। इसमें जल्द ही सोनोबॉय सिस्टम तैनात किया जाएगा। यह सिस्टम पानी के भीतर दुश्मन की पनडुब्बियों के सोनार सिग्नेचर को पहचान कर उसका डेटा सैटेलाइट के जरिए नौसेना के कमांड सेंटर तक भेज देगा। इसके बाद पी-8आई टोही विमान टॉरपीडो के जरिए दुश्मन के मंसूबों को पल भर में ध्वस्त कर देंगे।

चीन की आर्थिक लाइफलाइन और भारत की रणनीतिक स्थिति

भारत की भौगोलिक स्थिति उसे हिंद महासागर में एक स्वाभाविक लीडर बनाती है। दुनिया का 80 प्रतिशत कमर्शियल तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। अदन की खाड़ी और मलक्का स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भारत की कड़ी निगरानी चीन के लिए चिंता का विषय है। मलक्का स्ट्रेट, जो चीन की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानी जाती है, वहां भारतीय नौसेना की तैनाती चीन को किसी भी दुस्साहस से रोकती है। यदि चीन अपनी नौसेना के साथ इस संकरे रास्ते से गुजरने की कोशिश करता है, तो भारत का आक्रामक रुख और सैन्य तैयारी उसे भारी पड़ सकती है।

भारत की त्रि-स्तरीय रक्षा रणनीति

भारत समुद्र में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन मुख्य स्तंभों पर काम कर रहा है। पहला, भारत की शानदार भौगोलिक लोकेशन। दूसरा, आधुनिक ए2एडी यानी एंटी एक्सेस एरिया डिनायल नेवल स्ट्रैटेजी, जिसका उद्देश्य किसी भी बाहरी नेवी को अपने समुद्री क्षेत्र में घुसने से रोकना है। तीसरा, ब्रह्मोस मिसाइल से लैस सुखोई विमान, पी-8आई हंटर विमान और साइलेंट पनडुब्बियां। यह पूरा तंत्र चीन को भारतीय सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने पर मजबूर कर देता है। चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी अब भारत की इस सर्विलांस क्षमता के आगे असुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि ड्रोन की पैनी नजर उन्हें कहीं भी छिपने नहीं देगी।

सीमा पार भी अचूक प्रहार

MQ-9B ड्रोन का इस्तेमाल केवल समंदर तक सीमित नहीं है। यह एलओसी और एलएसी के पास दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने के लिए एक ब्रह्मास्त्र की तरह कार्य करेगा। इसकी सटीक मिसाइल प्रणाली और कैमरा दुश्मन के छोटे से छोटे मूवमेंट को कैप्चर कर उसे नष्ट करने में सक्षम है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसे रिमोट से नियंत्रित किया जाता है, जिससे भारतीय सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना सुरक्षित दूरी से बड़े ऑपरेशंस को अंजाम दिया जा सकता है। यह तकनीक अब भारत को वैश्विक सुरक्षा मंच पर एक नई ऊंचाई प्रदान करती है और किसी भी विदेशी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने की शक्ति देती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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