बिहार
2 घंटे पहले
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नेपाल में आई आपदा ने उजड़ा हंसता-खेलता परिवार
बिहार के मोतिहारी जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने एक परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया है। रक्सौल के आदापुर प्रखंड के लाला छपरा गांव का रहने वाला एक परिवार पिछले 15 वर्षों से नेपाल में रह रहा था। वहां आई जलप्रलय में परिवार के पांच सदस्य अचानक लापता हो गए। इस हादसे के बाद घर के बचे हुए सदस्य गहरे सदमे में हैं और अपनों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
मां के आखिरी शब्द जो अब कानों में गूंजते हैं
इस त्रासदी का शिकार हुए राजा कुमार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि घटना वाले दिन उनकी मां से फोन पर बात हो रही थी। फोन के दूसरी ओर से मां की आवाज आई, 'बड़ा सैलाब आवत बा, सब लोग ठीक जगह पर चल जाई।' मां के ये शब्द राजा के कानों में अभी भी गूंज रहे हैं। मां की आवाज में घबराहट और अपने बच्चों को लेकर चिंता साफ झलक रही थी। वह सबको सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दे रही थीं, लेकिन अचानक मोबाइल का संपर्क कट गया। इसके बाद राजा का अपनी मां से कभी संपर्क नहीं हो पाया।
दस दिन बाद भी कोई सुराग नहीं
राजा कुमार ने बताया कि इस जलप्रलय की चपेट में उनकी मां, तीन बहनें और एक भांजा आ गए। घटना को बीते हुए 10 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अब तक इनमें से किसी का भी कोई सुराग नहीं मिला है। जिस घर में यह परिवार रहता था, वह भी पूरी तरह तबाह हो चुका है। परिवार के लोगों के मुताबिक, अब तक किसी का शव भी बरामद नहीं हुआ है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। वे अपनों के वापस लौटने की एक छोटी सी उम्मीद और अंतिम संस्कार के बीच मानसिक द्वंद्व से गुजर रहे हैं।
15 साल का सफर और अचानक आई तबाही
मिली जानकारी के अनुसार, बुधन भगत का परिवार पिछले 15 साल से नेपाल में रह रहा था। वहां रहकर वे कबाड़ का काम करते थे और अपनी आजीविका चलाते थे। परिवार में चार बेटियां और एक बेटा था। त्रासदी के समय बुधन भगत की तीन बेटियां अपनी मां के साथ मौजूद थीं। एक बेटी किसी काम से कहीं और जाने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही इस भयावह घटना की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया। इस आपदा में बुधन भगत, उनके बेटे राजा कुमार और एक बेटी किसी तरह सुरक्षित बचने में कामयाब रहे, लेकिन बाकी पांच सदस्य बाढ़ की भेंट चढ़ गए।
अब नेपाल लौटना नहीं चाहता परिवार
इस हादसे ने राजा कुमार और उनके बचे हुए परिजनों को अंदर से तोड़कर रख दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अब वे दोबारा नेपाल की ओर रुख नहीं करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जिस जगह ने उनसे उनके अपने छीन लिए, जहां उनके परिवार को मौत के घाट उतार दिया, वहां दोबारा पैर रखने की हिम्मत उनमें नहीं बची है। नेपाल की इस विनाशकारी बाढ़ ने न केवल उनके घर को तहस-नहस किया है, बल्कि उनके भविष्य के सपनों को भी जलमग्न कर दिया है। फिलहाल पूरा परिवार सदमे में है और अपने लापता सदस्यों की सूचना का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
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