कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीते गौरव की मौत, डिहाइड्रेशन और कमजोरी ने ली जान मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक दुखद समाचार आया है जहाँ नामीबिया से लाए गए चीते गौरव की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।

कूनो नेशनल पार्क से सामने आई दुखद खबर

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए एक बड़ा झटका लगा है। नामीबिया से भारत लाए गए चीतों में शामिल गौरव की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक 21 सितंबर, सोमवार को शाम के लगभग 4 बजे इस चीते ने अंतिम सांस ली। गौरव की उम्र 10 साल से अधिक बताई जा रही थी। उसे बचाने के लिए वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।

बीमारी और रेस्क्यू का घटनाक्रम

इस दुखद घटना की शुरुआत 12 सितंबर को हुई, जब वन अधिकारियों की नजर जंगल में घूम रहे गौरव पर पड़ी। वह बेहद सुस्त और कमजोर अवस्था में दिखाई दे रहा था। चीते की गिरती सेहत को भांपते हुए टीम ने तुरंत उसे रेस्क्यू करने का निर्णय लिया और सुरक्षित स्थान पर ले आए। इसके बाद गौरव को पालपुर स्थित क्वारेंटाइन बोमा में शिफ्ट किया गया, ताकि उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाएं दी जा सकें।

लगातार स्वास्थ्य बिगड़ने से टूटी उम्मीद

क्वारेंटाइन बोमा में विशेषज्ञों की देखरेख में उसका निरंतर इलाज चलता रहा। मेडिकल सपोर्ट के बावजूद उसकी सेहत में सुधार के कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले। डॉक्टरों द्वारा की गई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि गौरव गंभीर डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से जूझ रहा था। इसके साथ ही उसकी मांसपेशियों में अत्यधिक कमजोरी पाई गई थी। चिकित्सकों को यह भी आशंका है कि वह किसी पुरानी या गुप्त बीमारी से भी पीड़ित रहा होगा, जिसने उसके शरीर को भीतर से कमजोर कर दिया था।

पोस्टमॉर्टम से खुलेगा मौत का सही राज

चीते की मौत के सटीक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। वन प्रबंधन के अनुसार, मृत्यु के वास्तविक तथ्यों को जानने के लिए शव का पोस्टमॉर्टम करवाया जा रहा है। जांच के लिए शरीर से आवश्यक नमूने भी एकत्र किए गए हैं। जब तक लैब से विस्तृत रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक मौत की पुख्ता वजह बताना जल्दबाजी होगी।

भारत में अब चीतों की वर्तमान स्थिति

गौरव के निधन के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में रहने वाले चीतों की संख्या में कमी आई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, कूनो में अब 51 चीते ही मौजूद हैं। इनमें से 36 चीते वे हैं जिनका जन्म भारत की धरती पर ही हुआ है। इसके अलावा, गांधी सागर अभयारण्य में वर्तमान में 4 चीते रह रहे हैं। इन सब को मिलाकर अब पूरे देश में कुल 55 चीते बचे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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