पहली बारिश के साथ ही किसान ने जुतवाया खेत और बो दी ये फसल, 20 दिन में निकल आएंगे पौधे और फिर शुरू होगी कमाई छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट में 10 साल से खेती कर रहे एक किसान ने पहली बारिश होते ही खेत जुतवाकर मूली के 10000 पौधे लगाए हैं और इसे सबसे आसान व फायदेमंद खेती बताया है।

मानसून की पहली बौछार पड़ते ही छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक किसान ने अपने खेत को लेकर एक अलग प्रयोग कर दिखाया है। उन्होंने बारिश शुरू होते ही फौरन खेत जुतवाया, भुरभुरी मिट्टी की मेड़ तैयार की और बीज बो दिए। किसान का दावा है कि यह खेती करना सबसे आसान है और इससे अच्छी कमाई भी होती है।

इन दिनों सरगुजा जिले के किसान खरीफ सीजन में सब्जी वर्ग की फसलों की ओर ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं। मैनपाट इलाके में बीते 10 साल से खेती कर रहे एक किसान ने पहली बारिश के बाद मूली के 10000 हजार पौधे लगाए हैं। उन्होंने भुरभुरी मिट्टी में मेड़ बनाकर पौधे लगाए हैं और साथ में गोबर खाद का इस्तेमाल किया है, ताकि पौधा 10-15 दिन में तैयार हो जाए।

किसान ने पहली बारिश में ही क्यों की बुवाई

किसान अजय दास ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने खेत में मेड़ बनाकर मूली की बुवाई की है। इस खेती में करीब 10000 पौधों के हिसाब से बीज बोए गए हैं। फसल की अच्छी बढ़वार के लिए गोबर खाद के साथ-साथ अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का भी उपयोग किया जाएगा।

भुरभुरी मिट्टी में बेहतर उत्पादन

अजय दास के मुताबिक, मूली की खेती के लिए भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है। खेत की तैयारी के दौरान ट्रैक्टर से जुताई कराई गई और डीएपी खाद का प्रयोग किया गया, ताकि पौधों को शुरुआती पोषण मिल सके।

उन्होंने बताया कि बुवाई के लगभग 15 से 20 दिन बाद खेत में मूली के पौधे दिखाई देने लगते हैं। बरसात के मौसम में फसल की बढ़वार अच्छी होती है और बाजार में भी अच्छे दाम मिलने की संभावना बनी रहती है।

मैनपाट क्षेत्र में अच्छी मांग

किसान का कहना है कि पूरे मैनपाट क्षेत्र में मूली की अच्छी मांग रहती है। स्थानीय बाजारों के अलावा आसपास के इलाकों में भी इसकी आपूर्ति की जाती है, जिससे किसानों को बिक्री में किसी तरह की समस्या नहीं आती।

अजय दास ने यह भी बताया कि मूली की फसल में कीटों का प्रकोप हो सकता है, इसलिए समय-समय पर दवाओं का छिड़काव करना जरूरी होता है। सिंचाई के लिए उनके पास पंप मौजूद है, जिससे जरूरत पड़ने पर फसल को पानी दिया जाता है।

10वीं तक पढ़ाई, फिर चुनी खेती

अजय दास ने बताया कि उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद खेती-किसानी में रुचि होने के कारण उन्होंने इसी क्षेत्र को अपना व्यवसाय बना लिया। उनका कहना है कि खेती से उनके परिवार का जीवनयापन अच्छे से हो रहा है और इस काम में उन्हें संतोष भी मिलता है।

नए किसानों के लिए आसान फसल

अजय दास का मानना है कि मूली ऐसी फसल है, जिसे उगाना अपेक्षाकृत आसान है। हालांकि मेड़ बनाकर खेती करने से दवाओं का छिड़काव और फसल की देखभाल अधिक सुविधाजनक हो जाती है, साथ ही लागत भी कम आती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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