नई पीढ़ी की मानसिकता पर बोले मोहन भागवत, 'Gen-Z बिना सोचे-समझे करते हैं नकल' भारत एक दिन पहले 7
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान आज की पीढ़ी और विवाह संस्था पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने सह-जीवन के चलन पर चिंता जताते हुए परिवार में संवाद की जरूरत पर जोर दिया।

आज की पीढ़ी की मानसिकता पर संघ प्रमुख की टिप्पणी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नई पीढ़ी और सामाजिक बदलावों को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। हैदराबाद में विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित 'समकालीन मातृत्व' विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने युवाओं के व्यवहार और विवाह जैसी संस्थाओं पर अपने विचार रखे।

Gen-Z की सोच पर उठाए सवाल

मोहन भागवत ने विशेष रूप से Gen-Z पीढ़ी का जिक्र करते हुए कहा कि आज के युवा अक्सर बिना गहराई से सोचे-समझे किसी भी चीज की ओर खिंचे चले जाते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि नई पीढ़ी के लोग काफी भावुक होते हैं और दूसरों की देखा-देखी काम करने के आदी हो चुके हैं। भागवत के अनुसार, यह पीढ़ी शांत मन से चीजों का विश्लेषण करने के बजाय वही अपना लेती है जो उन्हें उस समय सही लगता है।

विवाह बनाम सह-जीवन

विवाह संस्था पर चर्चा करते हुए भागवत ने इसे एक ऐसा अनुशासन बताया जो समाज में धर्म को स्थापित करने का काम करता है। उन्होंने 'सह-जीवन' यानी Co-Living संबंधों की हकीकत पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया भर में इसके क्या नतीजे सामने आ रहे हैं, यह सबको दिख रहा है। उन्होंने इसे जिम्मेदारी से भागने वाला चलन करार देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था में लोग केवल अपनी खुशी तलाशते हैं। इसमें न तो कोई जिम्मेदारी होती है और न ही स्थायित्व, बस तब तक साथ रहो जब तक मन करे, अन्यथा अलग हो जाओ।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन

आरएसएस प्रमुख ने स्पष्ट किया कि वह आधुनिकता के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ खुद को बदलना देश की महान परंपराओं का ही एक हिस्सा है, इसलिए आधुनिकता का स्वागत किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने Co-Living जैसे चलन को पश्चिमी संस्कृति की नकल बताया। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि LGBTQ समुदाय समाज का ही अभिन्न अंग है और उन्हें किसी भी प्रकार से हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए।

पारिवारिक संवाद की महत्ता

बच्चों की परवरिश को लेकर उन्होंने अभिभावकों को मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अनुशासन बरतने की सलाह दी। भागवत ने कहा कि परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संवाद बहुत महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी के मन में उठने वाले सवालों का जवाब देना और परिवार के भीतर के मुद्दों को बातचीत के माध्यम से सुलझाना आज के समय की बड़ी जरूरत है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में Gen-Z के विभिन्न मुद्दों और उनके प्रभाव पर देशभर में बहस तेज हो गई है, जिस पर अब संघ प्रमुख ने भी अपनी राय व्यक्त की है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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