विश्व
12 घंटे पहले
4
विचारों
अमेरिका की मोस्ट वॉन्टेड सूची में खदरा ईसा
सीरिया में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (ISIS) के नेटवर्क से जुड़ी एक महिला आतंकी कमांडर को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। सोमालिया में जन्मी और डच नागरिक बताई जाने वाली खदरा ईसा का नाम दुनिया की खुफिया एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईसा, जिसे उम्म कका अल-सोमाली के नाम से भी जाना जाता है, के बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी देने वाले को 50 लाख अमेरिकी डॉलर, जो भारतीय मुद्रा में करीब 48 करोड़ रुपये होते हैं, का इनाम देने का ऐलान किया है। यह पहली बार नहीं है कि अमेरिका ने उसे निशाना बनाया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी उसके ठिकाने या पहचान की जानकारी देने के लिए इनाम की घोषणा की गई थी, लेकिन अब उसे पकड़ने की कोशिशें और अधिक गंभीर हो गई हैं।
कौन है खदरा ईसा और उसकी भूमिका
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, खदरा ईसा सीरिया में सक्रिय एक महिला लड़ाकू बटालियन 'खतीबा नुसायबा' से गहरे रूप से जुड़ी रही है। संगठन के भीतर उसकी भूमिका महज एक आम सदस्य की नहीं, बल्कि एक प्रमुख शरिया प्रशिक्षक की रही है। उसे आईएसआईएस-एनके (ISIS-NK) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। आरोप है कि उसने संगठन की चरमपंथी विचारधारा को न केवल आत्मसात किया, बल्कि उसे अन्य महिला सदस्यों के बीच फैलाने में मुख्य भूमिका निभाई। उसने महिलाओं को उन हिंसक अभियानों और हत्याओं के लिए तैयार किया, जिन्हें संगठन ने अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया था। अमेरिकी विदेश विभाग के नोटिस में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उसने अपनी ट्रेनिंग के जरिए ऐसी महिलाओं को तैयार किया जो आत्मघाती हमलों को उचित मानती थीं और नागरिकों की हत्याओं में संकोच नहीं करती थीं।
इनाम की घोषणा और अमेरिकी रणनीति
अमेरिकी विदेश विभाग ने इसी साल 14 सितंबर को खदरा ईसा पर इनाम की राशि को फिर से सार्वजनिक किया है। 50 लाख डॉलर का इनाम यह दर्शाता है कि अमेरिकी एजेंसियां उसे वैश्विक जिहादी नेटवर्क में एक रणनीतिक महत्व की व्यक्ति के रूप में देखती हैं। अमेरिका अपने 'रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस' कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे वांछित अपराधियों को पकड़ने के लिए जनता से जानकारी जुटाता है। खदरा ईसा के खिलाफ लगाए गए आरोपों में यह भी शामिल है कि उसने महिलाओं के खिलाफ कठोर हिंसा का इस्तेमाल करके एक ऐसे समूह का नेतृत्व किया, जिसका एकमात्र मकसद शरिया कानूनों को अपने तरीके से लागू करना था। उसने केवल प्रशिक्षण ही नहीं दिया, बल्कि संगठन में नई महिला सदस्यों की भर्ती और उनके द्वारा किए जाने वाले हमलों के निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
आतंकी संगठनों में बदलती महिलाओं की भूमिका
आतंकी संगठनों में महिलाओं का उपयोग इतिहास में अलग-अलग रूपों में होता रहा है। पहले के समय में जिहादी गुटों में महिलाओं को केवल ऐसे अभियानों में इस्तेमाल किया जाता था जहां सुरक्षा जांच से बचना आसान होता था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महिला आत्मघाती हमलावर थे। वर्ष 1985 में लेबनान की सना मेहैदली हो या 1991 में राजीव गांधी की हत्या करने वाली धनु, इन सभी ने आत्मघाती हमले का रास्ता चुना था। कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी और बाद के वर्षों में हमास जैसे संगठनों ने भी अपनी रणनीतियों के अनुसार महिलाओं का इस्तेमाल किया। हालांकि, नाइजीरिया के बोको हराम ने इस दिशा में एक नया रिकॉर्ड बनाया था। 'कॉम्बैटिंग टेररिज्म सेंटर' के एक अध्ययन में पाया गया कि अप्रैल 2011 से जून 2017 के बीच 238 आत्मघाती हमलों में करीब 434 हमलावर थे, जिनमें से 56 प्रतिशत महिलाएं थीं। यह सांख्यिकीय बदलाव यह बताता है कि हमले के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करना एक संगठित रणनीति बन गई थी, लेकिन तब भी महिलाएं रणनीतिक पदों से दूर थीं।
आईएसआईएस का महिला ब्रिगेड और नया मोड़
इस्लामिक स्टेट ने फरवरी 2014 में सीरिया में 'अल-खंसा ब्रिगेड' का गठन किया था। यह अपनी तरह का पहला ऐसा संगठन था जो पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित था। इसका उद्देश्य केवल हमला करना नहीं, बल्कि क्षेत्र में अन्य महिलाओं की निगरानी करना और संगठन द्वारा तय किए गए सामाजिक नियमों को सख्ती से लागू करना था। यह बदलाव संकेत देता है कि आतंकी गुटों ने अब महिलाओं को केवल 'विस्फोटक ले जाने वाली मशीन' के बजाय संगठन की प्रशासनिक और वैचारिक कमान सौंपना शुरू कर दिया है। खदरा ईसा इसी नई पीढ़ी की जिहादी कमांडर है। उसके ऊपर लगे आरोपों से यह स्पष्ट होता है कि उसने केवल हमला नहीं किया, बल्कि संगठन की वैचारिक नींव रखने और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाई है।
खदरा ईसा मामले का वैश्विक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि खदरा ईसा का मामला जिहादी संगठनों की बदलती संरचना का सबूत है। अब महिलाएं उन जिम्मेदारियों को संभाल रही हैं जो पहले केवल पुरुषों तक सीमित थीं। भर्ती, प्रशिक्षण, वैचारिक प्रचार और रोजमर्रा के संगठनात्मक फैसले अब इन महिला कमांडरों के हाथ में हैं। खदरा ईसा पर अमेरिका का भारी इनाम घोषित करना यह दर्शाता है कि एजेंसियां अब इस खतरे को समझ चुकी हैं कि महिलाओं को केवल हमले के औजार के रूप में नहीं, बल्कि विचारधारा के विस्तारक के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि ईसा पकड़ी जाती है, तो यह आईएसआईएस के महिला विंग की कार्यप्रणाली को समझने के लिए एक बड़ा सुराग हो सकता है। फिलहाल, अमेरिका ने उसे पकड़ने के लिए अपना पूरा दबाव बढ़ा दिया है और यह इनाम उसे खोजने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
Comments
0 comment