राजगढ़: सड़कों पर आवारा सांडों का खौफ, स्कूल से लौट रही बच्ची को मारी टक्कर मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 81
राजगढ़ जिले के जीरापुर में आवारा सांडों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, हाल ही में एक बच्ची को सांड ने टक्कर मारकर घायल कर दिया।

जीरापुर में आवारा पशुओं का आतंक

राजगढ़ जिले के जीरापुर में सड़कों पर आवारा सांडों ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के व्यस्त बाजार और मुख्य रास्ते अब सांडों की लड़ाई का अखाड़ा बन चुके हैं। हाल ही में जमाई कॉलोनी से एक विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां घर लौट रही एक स्कूली छात्रा को एक सांड ने अचानक जोरदार टक्कर मार दी। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सांड ने बच्ची को पटककर किया अचेत

सीसीटीवी में साफ देखा जा सकता है कि बच्ची शांति से अपने रास्ते से गुजर रही थी, तभी एक तेज रफ्तार सांड ने उसे निशाना बनाया। हमले के बाद बच्ची सड़क पर गिर गई और डर व चोट के कारण मौके पर ही बेहोश हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने फौरन बच्ची की मदद की और प्राथमिक उपचार के बाद उसे होश में लाया। यह घटना नगर में फैली अराजकता का एक छोटा सा उदाहरण मात्र है।

व्यापार और आवाजाही पर बुरा असर

जीरापुर के मुख्य इलाकों, जैसे इंदर चौराहा, बस स्टैंड, खिलचीपुर नाका और माचलपुर नाका पर सांडों का जमावड़ा लगा रहता है। ये वजनदार सांड अक्सर सड़कों के बीचों-बीच लड़ते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है। दुकानदारों को डर के मारे अपनी दुकानें बंद करनी पड़ती हैं, और सड़क से गुजरने वाले राहगीर विशेषकर बुजुर्ग और बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर जनता में आक्रोश

नगर परिषद की लापरवाही स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है। इस तरह के हादसों की जानकारी होने के बावजूद अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी और बड़े दुर्घटना के होने का इंतजार कर रहा है। सड़क पर सांडों के हमले से पूर्व में भी कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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