उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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मथुरा में RLD नेता की बढ़ी मुश्किलें
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में राष्ट्रीय लोकदल के कद्दावर नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। उनके खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति यानी एससी/एसटी अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। यह मामला मथुरा के थाना हाईवे क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पुलिस ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी क्षेत्राधिकारी रिफाइनरी को सौंपी गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह विवादित घटनाक्रम 27 मई 2025 का है। बताया जा रहा है कि मथुरा में राष्ट्रीय लोकदल की ओर से एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा को संबोधित करते हुए त्रिलोक त्यागी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का उल्लेख करते समय कथित तौर पर 'हरिजन आयोग' शब्द का प्रयोग कर दिया। यह बयान सामने आने के बाद समुदाय विशेष के लोगों में काफी रोष देखने को मिला। इसके बाद हरियाणा के गुरुग्राम निवासी राजेंद्र प्रसाद ने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में लगाए गए आरोप
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में स्पष्ट तौर पर कहा कि एक जिम्मेदार राजनीतिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा 'हरिजन' शब्द का प्रयोग किया जाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह संवैधानिक प्रावधानों के भी विरुद्ध है। शिकायत में तर्क दिया गया कि भारत सरकार के विभिन्न प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार 'हरिजन' शब्द का इस्तेमाल आधिकारिक या सार्वजनिक मंचों पर करना अब सही नहीं माना जाता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक रूप से इस शब्द को बोलकर त्रिलोक त्यागी ने अनुसूचित जाति समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और समाज में अपमानजनक स्थिति पैदा की है। इसी आधार पर उन्होंने आयोग से सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
जांच के घेरे में वीडियो और साक्ष्य
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस शिकायत का गंभीरता से संज्ञान लिया और संबंधित पुलिस अधिकारियों को तुरंत आवश्यक कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए। आयोग के दखल के बाद मथुरा पुलिस हरकत में आई और थाना हाईवे में त्रिलोक त्यागी के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
पुलिस के आला अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले की जांच सीओ रिफाइनरी को सौंप दी गई है। जांच अधिकारी अब घटना के दिन के वीडियो फुटेज, उस दौरान मौजूद रहे लोगों के बयान और शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल इस मामले को लेकर स्थानीय राजनीति और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
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